धनबादा पावर परियोजना का मामला पहुंचा हाईकोर्ट,वन भूमि पर कार्यों की वैधता पर उठे सवाल,वन संरक्षण अधिनियम की अनदेखी का आरोप।

धरमजयगढ़ हेड/ धरमजयगढ़ विकासखंड के भालूपखना क्षेत्र में संचालित धनबादा पावर की 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना अब कानूनी विवादों में घिर गई है। परियोजना से जुड़े कथित वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के उल्लंघन के आरोपों को लेकर मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस संबंध में याचिकाकर्ता विवेक कुमार पांडेय द्वारा अधिवक्ता श्रेष्ठ गुप्ता के माध्यम से जनहित याचिका दायर की गई है।याचिका में आरोप लगाया गया है कि परियोजना से संबंधित कुछ निर्माण एवं विस्तार कार्य बिना आवश्यक वैधानिक अनुमति के किए गए। याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों में तत्कालीन वन मंडलाधिकारी, धरमजयगढ़ के पत्राचार का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वन एवं राजस्व वन भूमि पर गैर-वानिकी कार्यों की अनुमति सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त नहीं हुई थी, जबकि कार्य किए जाने के संकेत मिलते हैं।
खसरा नंबर 347 और 365 पर कार्य को लेकर सवाल
याचिका के अनुसार राजस्व वन क्षेत्र के खसरा नंबर 347 एवं 365 में कार्य किए जाने के आरोप हैं। जबकि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा 2 के तहत किसी भी वन भूमि का गैर-वानिकी उपयोग केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता। ऐसे में परियोजना से जुड़े कार्यों की वैधता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
33 केवी लाइन विस्तार पर भी विवाद
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि परियोजना को लाभ पहुंचाने के लिए 33 केवी विद्युत लाइन का विस्तार किया गया, जबकि आवश्यक अनुमतियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। जानकारी के अनुसार वन क्षेत्र में विद्युत पोल और केबल विस्तार कार्य को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह वन एवं पर्यावरण संबंधी नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है।
हाईकोर्ट में शासन ने मांगा जवाब के लिए समय
प्रकरण की सुनवाई के दौरान शासन की ओर से अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा गया है। अब मामले में अगली सुनवाई के दौरान शासन के जवाब के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। इस कारण परियोजना की वैधता और अनुमतियों को लेकर सभी की निगाहें हाईकोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं।
हाथी प्रभावित क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा पर भी चिंता
धनबादा पावर परियोजना का क्षेत्र हाथी प्रभावित वन क्षेत्र माना जाता है। पूर्व में इस इलाके में विद्युत करंट की चपेट में आने से कई हाथियों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बिजली विभाग के 11 केवी पोलों का उपयोग कर निजी परियोजना के लिए 33 केवी केबल लाइन विस्तार किए जाने की भी चर्चा है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो संबंधित विभागों और परियोजना प्रबंधन के लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
परियोजना पर मंडरा सकता है संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हाईकोर्ट की सुनवाई या जांच में वन संरक्षण अधिनियम, 1980, पर्यावरणीय स्वीकृतियों अथवा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो धनबादा पावर की लघु जल विद्युत परियोजना पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और परियोजना की गतिविधियों पर भी रोक लगाने जैसी कार्रवाई संभव हो सकती है।



