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धनबादा पावर के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती,वन अनुमति के बिना 33 केवी लाइन बिछाने का आरोप -ठेकेदार की भूमिका पर उठे सवाल?

हाथी प्रभावित वन क्षेत्र में नियमों की अनदेखी का दावा, डीएफओ बोले—अनियमितता मिली तो होगी कड़ी कार्रवाई

धरमजयगढ़ न्यूज़ #भालूपखना#
धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम भालूपखना स्थित धनबादा पावर की 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। परियोजना पर वन विभाग की अनुमति के बिना 33 केवी विद्युत लाइन विस्तार करने तथा वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। मामला अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई जारी है।सोशल एक्टिविस्ट एवं पत्रकार विवेक कुमार पांडेय द्वारा अधिवक्ता श्रेष्ठ गुप्ता के माध्यम से प्रस्तुत जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि परियोजना के लिए आवश्यक वन स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना वन एवं राजस्व भूमि में गैर-वानिकी गतिविधियां संचालित की गईं तथा 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन विस्तार में भी नियमों की अनदेखी की गई।

11 केवी पोल पर 33 केवी लाइन ले जाने का आरोप

याचिका में दावा किया गया है कि भालूपखना से चरखापारा तक 11 केवी विद्युत लाइन के नवीनीकरण कार्य के दौरान सीएसपीडीसीएल के नए पोल लगाए गए। आरोप है कि इन्हीं पोलों का उपयोग करते हुए निजी परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन भी ले जाई गई, जिससे अलग से वन भूमि डायवर्सन और वैधानिक अनुमतियों की आवश्यकता से बचा जा सके।आरोपों के अनुसार, परियोजना प्रबंधन ने पूर्व में ट्रांसमिशन लाइन एवं अन्य संरचनाओं के लिए वन विभाग तथा जिला प्रशासन के समक्ष अनुमति हेतु आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त होने से पहले ही निर्माण कार्य कर लिया गया।

फर्जी नवीनीकरण’ और मिलीभगत के आरोप

याचिकाकर्ता का आरोप है कि विद्युत विभाग के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से 11 केवी लाइन के नवीनीकरण के नाम पर ऐसा ढांचा तैयार किया गया, जिसका लाभ सीधे निजी जल विद्युत परियोजना को मिला। इससे सरकारी संसाधनों के संभावित दुरुपयोग और प्रक्रिया संबंधी पारदर्शिता पर प्रश्न उठ रहे हैं।

रजिस्टर्ड ठेकेदार की भूमिका भी सवालों के घेरे में

मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि 11 केवी लाइन नवीनीकरण तथा निजी परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन—दोनों कार्यों का ठेका एक ही ठेकेदार कुलदीप सिंह के पास था। आरोप है कि अलग-अलग कार्यों के लिए पृथक संरचना विकसित करने के बजाय एक ही विद्युत लाइन ढांचे का उपयोग किया गया, जिससे शासकीय और निजी कार्यों की सीमाएं धुंधली हो गईं।

#वन्यजीव सुरक्षा पर गंभीर सवाल हाथी प्रभावित क्षेत्र में 33 केवी लाइन विस्तार को लेकर बढ़ी चिंता,गलत पाए जाने पर होगा कार्यवाही डीएफओ#

धरमजयगढ़ वनमंडल प्रदेश के प्रमुख हाथी प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है, जहां सैकड़ों हाथियों का लगातार आवागमन बना रहता है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत हाथी अनुसूची-1 (Schedule-I) के संरक्षित वन्यजीव हैं और उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में विद्युत अधोसंरचना के विस्तार को लेकर उठे सवालों ने वन्यजीव सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 21 दिसंबर 2001 से 5 जून 2026 तक धरमजयगढ़ वनमंडल क्षेत्र में हाथियों के हमलों में 180 ग्रामीणों की मृत्यु हो चुकी है। वहीं 3 दिसंबर 2005 से 5 जून 2026तक 75 हाथियों की मौत दर्ज की गई है। बकरुमा रेंज में ही अब तक 3 हाथियों और 9 ग्रामीणों की मौत की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।वन्यजीवों की मौत के कारणों का विश्लेषण करने पर यह तथ्य सामने आता है कि हाथियों की बड़ी संख्या में मौतें विद्युत करंट की चपेट में आने से हुई हैं। ऐसे में यदि एक ही विद्युत पोल संरचना पर 11 केवी और 33 केवी लाइन संचालित किए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह वन्यजीवों विशेषकर हाथियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।इस पूरे मामले पर वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) जितेंद्र उपाध्याय ने कहा कि विद्युत विभाग के सहायक अभियंता द्वारा पत्र के माध्यम से केवल 11 केवी विद्युत लाइन के लिए पोल विस्तार की जानकारी दी गई थी। यदि जांच में यह पाया जाता है कि उन्हीं पोलों पर 33 केवी लाईन भी ले जाई गई है और इसके लिए आवश्यक वन स्वीकृतियां प्राप्त नहीं की गई हैं, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध वन अधिनियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।वर्तमान में धनबादा पावर परियोजना से जुड़ा यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में क्षेत्रवासियों, पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों की निगाहें न्यायालय की आगामी सुनवाई और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और विद्युत परियोजनाओं में नियमों के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता।

Sajal Kumar Madhu

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