3,000 किलोमीटर का सफर, न्याय की पुकार किर्गिस्तान से जंतर-मंतर पहुँची धरमजयगढ़ की बेटी डॉ. शीफा खान, युवाओं की आवाज़ बनी ताकत

नई दिल्ली/धरमजयगढ़।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ की बेटी डॉ. शीफा खुर्शीद खान (MBBS) ने न्याय और इंसानियत के समर्थन में एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। किर्गिस्तान से लगभग 3,000 किलोमीटर की दूरी तय कर वह नई दिल्ली के जंतर-मंतर पहुँचीं और युवाओं के साथ अपनी एकजुटता दर्ज कराई।पडॉ. शीफा खान ने कहा कि जब समाज में अन्याय दिखाई दे, तब चुप रहना समाधान नहीं होता। उन्होंने युवाओं से सच का साथ देने, सवाल पूछने और न्याय, समानता तथा इंसानियत के लिए आवाज़ उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, सवाल पूछिए, सच का साथ दीजिए और हर उस आवाज़ के साथ खड़े रहिए जो न्याय, समानता और इंसानियत की बात करती है।डॉ. शीफा ने यह भी कहा कि इतिहास हमेशा उन्हीं लोगों को याद रखता है जिन्होंने सच बोलने का साहस दिखाया। डर या स्वार्थ के कारण खामोश रहने वाले लोग बदलाव की कहानी नहीं लिखते।
उनका मानना है कि समाज में परिवर्तन भीड़ के इंतज़ार से नहीं, बल्कि एक जागरूक व्यक्ति के साहस से शुरू होता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि अपनी आवाज़ को समाज के अधिकार, सम्मान और बेहतर भविष्य की रक्षा का माध्यम बनाएं।उन्होंने संदेश दिया कि बोलिए, जागिए और दूसरों को भी जगाइए। यही जागरूकता और एकजुटता युवा साथियों की जीत की सबसे बड़ी वजह बनी।
धरमजयगढ़ की बेटी डॉ. शीफा खान का यह कदम युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है और यह संदेश देता है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो हजारों किलोमीटर की दूरी भी न्याय और सच की आवाज़ बनने से नहीं रोक सकती।



