दुर्गापुर–शाहपुर SECL परियोजना में अवैध पोल्ट्री फार्म और गोदाम बनाने वाले कोयला खदान खुलवाने का लेगा निर्णय क्या। देखे चर्चा का वीडियो

धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ ब्लॉक अंतर्गत प्रस्तावित दुर्गापुर–शाहपुर SECL ओपन कोल परियोजना को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। कोयला मंत्रालय द्वारा वर्ष 2016 में लगभग 1677 हेक्टेयर भूमि को ओपन कोयला खदान के लिए प्रस्तावित किए जाने के बाद से SECL अधिकारियों द्वारा प्रभावित गांवों में सहमति लेने के प्रयास लगातार जारी हैं, लेकिन ग्रामीणों का विरोध अब भी बरकरार बताया जा रहा है।बीते दिनों धरमजयगढ़ के तत्कालीन SDM दिगेश पटेल ने ग्राम पंचायत शाहपुर में प्रभावित किसानों और ग्रामीणों की बैठक बुलाई थी। बैठक की सूचना मुनादी के माध्यम से दी गई थी, जिसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और परियोजना का खुलकर विरोध किया।

ग्रामीणों का आरोप है कि बीते दिनों कई बार SECL अधिकारियों ने अपने समर्थक लोगों को बुलाकर बैठकों में समर्थन दिखाने की कोशिश की और बाद में उसे मीडिया में सहमति के रूप में प्रचारित करते देखे गए है।इसी क्रम में अंबेटिकरा में आयोजित एक अन्य बैठक को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों का कहना है कि इस बैठक की सूचना फोन के माध्यम से चुनिंदा लोगों को दी गई थी। बैठक की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद कई बड़े किसान भी पहुंचे, जिनके पास 50 एकड़ से अधिक भूमि होने की बात सामने आई। इन किसानों ने भी परियोजना का विरोध किया। विरोध बढ़ता देख SECL रायगढ़ के महाप्रबंधक ने कथित रूप से कहा कि यदि ग्रामीण कंपनी को नहीं चाहेंगे तो खदान नहीं खोली जाएगी।हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद भी SECL द्वारा ड्रोन सर्वे कराया गया, जिसे उन्होंने जबरन कार्रवाई बताया। इस मामले की शिकायत पुलिस थाना धरमजयगढ़ में भी किए जाने की बात कही जा रही है।इसके बाद शाहपुर कॉलोनी स्थित कीर्तन मैदान में प्रभावित किसानों की खुली बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न गांवों के किसानों ने एक स्वर में भूमि न देने का निर्णय दोहराया और मामले को हाईकोर्ट तथा मुख्यमंत्री तक ले जाने की बात कही।अब विवाद का नया केंद्र 11 अगस्त को जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के बैठक कक्ष में हुई एक बैठक बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बैठक की सूचना किसी भी प्रभावित गांव में मुनादी के माध्यम से नहीं दी गई। आरोप यह भी है कि SECL कर्मचारियों ने फोन के जरिए जनप्रतिनिधियों और कुछ ऐसे लोगों को बुलाया, जिन्होंने कथित रूप से अधिक मुआवजा पाने के उद्देश्य से अपने खेतों में पोल्ट्री फार्म और गोदाम बना रखे हैं। ग्रामीणों ने ऐसे निर्माणों की वैधता और उनकी जांच की मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में प्रभावित किसानों की राय जाननी है तो बैठकें खुले मंच पर, सार्वजनिक सूचना और मुनादी के साथ गांवों में आयोजित की जानी चाहिए। बंद कमरे में होने वाली बैठकों से न तो विश्वास बनेगा और न ही कोई सार्थक समाधान निकलेगा।सूत्रों के अनुसार आने वाले दो–तीन दिनों में जिला कलेक्टर की मौजूदगी में प्रभावित किसानों की एक और बैठक प्रस्तावित है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार सभी प्रभावित गांवों को सार्वजनिक रूप से सूचना देकर खुली बैठक बुलाई जाएगी, या फिर सीमित लोगों के साथ बंद कमरे में चर्चा कर सहमति का दावा किया जाएगा।दुर्गापुर–शाहपुर SECL परियोजना को लेकर क्षेत्र में बढ़ते विरोध और बैठकों की प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच अब सभी की नजर आगामी कलेक्टर बैठक पर टिकी हुई है। आने वाले कुछ दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि प्रशासन और SECL खुली जनसुनवाई का रास्ता अपनाते हैं या बंद दरवाजों की बैठकें ही जारी रहेंगी।



