ग्राम लात के ग्रामीणों को15 साल बाद हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, SECL की अपील खारिज

धरमजयगढ़ हेड//
धरमजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम लात के ग्रामीणों को लगभग 15 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने 11 अगस्त 2026 को SECL प्रबंधन की अपील खारिज कर दी है। इस फैसले से प्रभावित ग्रामीणों की रोजगार संबंधी मांग को महत्वपूर्ण न्यायिक मजबूती मिली है।ग्राम लात में वर्ष 2009 में भूमि अधिग्रहण किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि अधिग्रहण के समय किए गए वादों, MOU तथा सहमति पत्रों के आधार पर उन्हें रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था। वादा पूरा नहीं होने पर ग्रामीण न्यायालय की शरण में गए और तब से लगातार न्याय के लिए संघर्ष कर रहे थे।इस मामले में 27 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए SECL प्रबंधन को निर्देश दिया था कि भूमि अधिग्रहण के समय लागू छत्तीसगढ़ पुनर्वास नीति 2007 के अनुसार पात्र ग्रामीणों को रोजगार देने के संबंध में 45 दिनों के भीतर विचार किया जाए।
उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद SECL प्रबंधन ने आदेश में संशोधन तथा अपील के माध्यम से राहत पाने का प्रयास किया, लेकिन न्यायालय ने SECL की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और 11 अगस्त 2026 को अपील खारिज कर दी।ग्रामीणों ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण के समय किए गए वादों और सहमति का पालन होना चाहिए तथा प्रभावित परिवारों को उनका वैधानिक अधिकार मिलना चाहिए। उनका कहना है कि यह फैसला केवल ग्राम लात ही नहीं, बल्कि अन्य भू-विस्थापित परिवारों के लिए भी आशा की किरण है,हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब छत्तीसगढ़ पुनर्वास नीति 2007 के तहत पात्र ग्रामीणों को रोजगार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना और मजबूत हो गई है। वर्षों से रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीण परिवारों में न्याय मिलने की उम्मीद फिर से जाग उठी है,



