धरमजयगढ़ में राजस्व विभाग की शिकायत पर FIR दर्ज, धरमजयगढ़ के जाने माने दिग्गजों पर धोखाधड़ी का अपराध दर्ज//देखे नाम//

शासकीय पट्टे की 4.047 हेक्टेयर जमीन की अवैध बिक्री का बड़ा मामला उजागर
धरमजयगढ़ हेड//धरमजयगढ़ क्षेत्र में शासकीय पट्टे की भूमि के कथित अवैध क्रय-विक्रय का बड़ा मामला सामने आया है। राजस्व विभाग की शिकायत पर पुलिस थाना धरमजयगढ़ में अपराध क्रमांक 0233/2026 दर्ज किया गया है। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) एवं 34 (साझा आपराधिक आशय) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी गई है।पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता रामकुमार राम (52 वर्ष), राजस्व निरीक्षक, बाकारूमा अतिरिक्त प्रभार धरमजयगढ़ ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) धरमजयगढ़ के आदेश पर थाना पहुंचकर लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। शिकायत में बताया गया कि ग्राम मेढ़रमार, तहसील धरमजयगढ़ स्थित भूमि खसरा नंबर 25/1/क/11, रकबा 4.047 हेक्टेयर शासकीय पट्टे की भूमि है।आरोप है कि प्रथम शासकीय पट्टेदार राजनंदन सिंह के वारिस नरेन्द्र सिंह एवं महेन्द्र प्रताप सिंह (निवासी इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश) ने सक्षम अधिकारी की अनुमति लिए बिना उक्त भूमि को 15 मार्च 2021 को पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्यम से राजेश अग्रवाल एवं बजरंग लाल अग्रवाल को लगभग 16 लाख 29 हजार रुपये में बेच दिया।

राजस्व अभिलेखों के सूक्ष्म परीक्षण के बाद अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय ने मामले को गंभीर मानते हुए कलेक्टर रायगढ़ को विधिसम्मत कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेजा था। जांच में यह पाया गया कि उक्त बिक्री छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 158 एवं 165(7-ख) का स्पष्ट उल्लंघन प्रतीत होती है।इसी आधार पर राजस्व विभाग ने विक्रेताओं, क्रेताओं तथा अन्य संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की उपयुक्त धाराओं में FIR दर्ज करने की अनुशंसा की थी। पुलिस ने शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।इस मामले में धरमजयगढ़ पुलिस थाना में मामले की नामजद आरोपी,नरेन्द्र सिंह,महेन्द्र प्रताप सिंह,राजेश अग्रवाल,बजरंग लाल अग्रवाल,थाना: धरमजयगढ़ जिला: रायगढ़ में हो चुका है,जिसक ,FIR संख्या: 0233/2026,दिनांक: 13 अगस्त 2026 समय: रात्रि 8:20 बजे मामला दर्ज किया गया है।जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि शासकीय पट्टे की भूमि का हस्तांतरण किन परिस्थितियों में किया गया,क्या अनुमति ली गई थी, और इस कथित अवैध सौदे में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे। मामले ने धरमजयगढ़ क्षेत्र में शासकीय भूमि प्रबंधन और भूमि लेनदेन की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



