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तीन मासूम बच्चों के साथ अकेला पिता, पत्नी और युवक पर धनराशि व मानसिक प्रताड़ना के आरोप — पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार

धरमजयगढ़/रायगढ़। ग्राम ससकोबा निवासी महेत्तर चौहान ने अपनी पत्नी नीरज चौहान एवं गांव के ही परदेसी यादव के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक रायगढ़ को लिखित आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच एवं उचित कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में उन्होंने धनराशि लेकर जाने, मानसिक प्रताड़ना, उकसावे तथा अपने तीन नाबालिग बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की है आवेदन के अनुसार, महेत्तर चौहान का विवाह वर्ष 2014 में सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था तथा उनके तीन नाबालिग बच्चे हैं। उनका आरोप है कि फरवरी 2026 में उनकी पत्नी और एक युवक के संबंधों को लेकर ग्राम स्तर पर पंचायत आयोजित हुई थी, जहां कथित रूप से लिखित समझौता भी किया गया था।

इसके बावजूद बाद में उनकी पत्नी घर छोड़कर चली गई और घर में रखी नकदी एवं अन्य राशि भी अपने साथ ले
गई,शिकायतकर्ता का कहना है कि बाद में पंचायत स्तर पर आर्थिक समझौते की बात हुई थी, लेकिन तय राशि का केवल एक हिस्सा ही उन्हें मिला, जबकि शेष राशि अब तक नहीं दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि संबंधित युवक का घर उनके घर के सामने होने के कारण उन्हें प्रतिदिन मानसिक तनाव और सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ रहा है।

परदेसी यादव

उनका यह भी कहना है कि उनकी मां से अलग रह रहे छोटे बच्चे भी भावनात्मक रूप से प्रभावित हो रहे हैं।महेत्तर चौहान ने बताया कि थाना स्तर पर आवेदन देने के बाद उन्हें मामला पारिवारिक एवं लेन-देन संबंधी बताते हुए न्यायालय की शरण लेने की सलाह दी गई। हालांकि उनका कहना है कि मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धनराशि, मानसिक प्रताड़ना और बच्चों के हितों का भी प्रश्न जुड़ा हुआ है।शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानूनन कार्रवाई की जाए तथा उन्हें और उनके बच्चों को सुरक्षा एवं मानसिक प्रताड़ना से राहत दिलाई जाए।

महिला बाल विकास को संज्ञान लेने की जरूरत,समाज के लिए संदेश।

धरमजयगढ़ रैरुमा चौकी के ग्राम शासकोबा के इस मामले को महिला बाल विकास धरमजयगढ़ को गंभीरता पूर्वक संज्ञान लेने की जरूरत है, यह मामला पारिवारिक विवाद, वैवाहिक विश्वास का टूटना और बच्चों के भविष्य पर पड़ने वाला प्रभाव केवल एक परिवार की समस्या नहीं बल्कि सामाजिक चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में सभी पक्षों को कानून का सम्मान करते हुए न्यायिक और वैधानिक प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो और मासूम बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो।

Sajal Kumar Madhu

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