मौत से जंग जीतकर लौटा जीवन 25 साल बाद डॉक्टर से मिला चमत्कारिक’ मरीज, भावुक हुआ पूरा परिवार

धरमजयगढ़। चिकित्सकों के निरंतर प्रयास और परिवार के अटूट ईश्वर विश्वास का एक अद्भुत उदाहरण सामने आया है, जहां 25 वर्ष पहले मौत से जूझ रहे एक मासूम को नया जीवन मिला था। आज वही बच्चा 30 वर्ष का युवक बनकर अपने जीवनदाता डॉक्टर से मिलने पहुंचा, तो भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।ग्राम पोटिया, धरमजयगढ़ निवासी शोभन साए किस्पोट्टा के सुपुत्र सतीश किस्पोट्टा जब मात्र 5 वर्ष के थे, तब वे सेरेब्रल मलेरिया (प्लास्मोडियम फाल्सीफेरम), गंभीर एनीमिया और पीलिया जैसी जानलेवा बीमारियों से ग्रसित हो गए थे। हालत इतनी गंभीर थी कि वे 21 दिनों तक बेहोशी की अवस्था में रहे। सिविल अस्पताल और रायगढ़ जिला अस्पताल में उपचार के बाद जब डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी, तब परिवार उन्हें गांव ले जाने की तैयारी में था।इसी दौरान परिजनों के आग्रह पर सतीश को धरमजयगढ़ में उनके रिश्तेदार कामिल एक्का के घर पर रखा गया। वहीं एसबीआई के श्री कौशिक और कामिल एक्का (DIET) के अनुरोध पर

डॉ. खुर्शीद खान ने घर पर ही उपचार जारी रखा और बच्चे को बचाने की हरसंभव कोशिश की।डॉ. खान के अथक प्रयास और परिवार के विश्वास का परिणाम रहा कि 7 दिनों बाद बच्चे को होश आ गया और धीरे-धीरे वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया।समय का चक्र घूमा और 25 साल बाद, 2 मई 2026 को वही सतीश किस्पोट्टा अपने पिता के साथ डॉ. खुर्शीद खान से मिलने पहुंचे। अपने जीवनदाता को सामने पाकर पिता-पुत्र दोनों भावुक हो उठे और डॉक्टर का आभार व्यक्त किया।यह घटना न केवल चिकित्सा जगत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सच्चे प्रयास और विश्वास से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।



