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सांस लेने लायक हवा नहीं फिर भी नई खदान?— गारे पेल्मा–1 में जनसुनवाई के खिलाफ उफना ग्रामीणों का गुस्सा,देखे वीडियो

धरमजयगढ़/रायगढ़।
जिंदल पावर लिमिटेड को आवंटित गारे पेल्मा सेक्टर–1 कोयला खदान की प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। बीते अक्टूबर में आयोजित की जाने वाली जनसुनवाई को हजारों ग्रामीणों के तीव्र विरोध और जिला कलेक्टर रायगढ़ कार्यालय पहुंचकर किए गए प्रदर्शन के बाद स्थगित कर दिया गया था,अब शासन द्वारा 8 दिसंबर को पुनः जनसुनवाई तय की गई है, लेकिन इस बार भी स्थानीय आदिवासी समुदाय और प्रभावित गांवों के सैकड़ों महिला–पुरुष और युवा लगातार विरोध प्रदर्शन करते हुए जनसुनवाई स्थल पर ही धरना देकर इसकी रद्दीकरण की मांग कर रहे हैं,ग्रामीणों का कहना है कि तमनार ब्लॉक पहले ही कोयला परियोजनाओं के बोझ से पूरी तरह दब चुका है। यहां 9 कोल ब्लॉक संचालित, 3 प्रस्तावित, और 2 पावर प्लांट चालू हैं— ऐसे में क्षेत्र की पर्यावरणीय क्षमता और सामाजिक संरचना दोनों पर असहनीय दबाव पड़ चुका है,कई एनजीटी, नीरी तथा आईसीएमआर की जांच रिपोर्टों ने इस इलाके को अत्यधिक प्रदूषित व अपनी सीमा से अधिक भार झेल रहे क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है। इतना ही नहीं, एनजीटी ने 2024 में गारे पेल्मा सेक्टर–2 खदान की पर्यावरण स्वीकृति तक रद्द कर दी थी।

इसके बावजूद, ग्रामीणों का आरोप है कि राज्य मशीनरी और कॉर्पोरेट कंपनियों की मिलीभगत के चलते पर्यावरणीय जोखिमों को अनदेखा करते हुए नित नई परियोजनाओं को मंजूरी दी जा रही है,स्थानीय ग्रामसभाओं द्वारा बार–बार पारित विरोध प्रस्तावों की अनदेखी भी ग्रामीणों में भारी असंतोष का कारण बनी है। प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों का कहना है कि खदान से बढ़ते प्रदूषण, विस्थापन और स्वास्थ्य संकट के मद्देनज़र इस जनसुनवाई का होना ही अनुचित है,

जनसुनवाई स्थल पर डटे ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी बात नहीं सुनता, तो विरोध और उग्र हो सकता है। अब देखना यह होगा कि भारी विरोध और जनदबाव के बीच प्रशासन जनसुनवाई को सुचारू रूप से करा पाता है या ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए इसे रद्द करने पर मजबूर होता है— इसका फैसला कुछ ही घंटों में स्पष्ट हो जाएगा।

Sajal Kumar Madhu

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