मातृभूमि बचाने देवताओं की शरण में दुर्गापुर के आदिवासी, पूजा-पाठ के बाद SECL के खिलाफ आर-पार का ऐलान।देखे वीडियो

धरमजयगढ़/रायगढ़। दुर्गापुर-शाहपुर SECL कोल ब्लॉक को लेकर एक बार फिर आदिवासी ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध में प्रभावित ग्राम दुर्गापुर में सैकड़ों आदिवासी ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाज से अपने देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर स्पष्ट ऐलान किया कि “अपनी मातृभूमि की एक इंच जमीन भी नहीं देंगे।धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित SECL कोल ब्लॉक का कुल रकबा 1,677.253 हेक्टेयर बताया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना को लेकर करीब 11 वर्षों से कवायद चल रही है, लेकिन प्रभावित किसानों और ग्रामीणों की सहमति अब तक नहीं बन पाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि समय-समय पर कुछ लोगों के माध्यम से बैठक और सहमति बनाने का प्रयास किया गया,
लेकिन व्यापक स्तर पर प्रभावित ग्रामीणों की सहमति हासिल नहीं हो सकी।इसी बीच 21 अगस्त 2026 को जिला प्रशासन की ओर से त्रिपक्षीय बैठक को लेकर आदेश जारी किया गया। बैठक में प्रभावित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को बुलाने का उल्लेख था। इसके बाद बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण बैठक में पहुंचे तथा SECL परियोजना को लेकर अपनी आपत्तियां और समस्याएं प्रशासन एवं SECL अधिकारियों के सामने रखीं। ग्रामीणों का कहना है कि बैठक के बावजूद उन्हें कोई ठोस और सार्थक समाधान दिखाई नहीं दिया।
दुर्गापुर में पारंपरिक पूजा के बाद लिया गया बड़ा फैसला
त्रिपक्षीय बैठक के बाद दुर्गापुर में ग्रामीणों की बैठक हुई। इस दौरान आदिवासी समाज के लोगों ने अपने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार बैठक स्थल पर नारियल, सुपारी और अगरबत्ती अर्पित कर देवी-देवताओं की पूजा की। इसके बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि SECL को अपनी जमीन नहीं दी जाएगी।ग्रामीणों ने कहा कि यह जमीन केवल खेती की जमीन नहीं है, बल्कि उनके पूर्वजों की विरासत, संस्कृति, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों का आधार है। इसलिए जमीन अधिग्रहण अथवा कोयला खदान के लिए दबाव किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अब हर प्रभावित गांव में बैठक, फिर होगा बड़ा आंदोलन
ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि SECL से प्रभावित सभी गांवों और टोलों में बैठकें आयोजित कर लोगों को एक मंच पर लाया जाएगा। इसके बाद बड़े जनाक्रोश आमसभा और रैली के आयोजन की तैयारी की जाएगी।ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन के माध्यम से राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय तक यह संदेश पहुंचाया जाएगा कि आदिवासी बहुल क्षेत्र में उनकी सहमति और अधिकारों की अनदेखी कर कोल ब्लॉक खोलने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लड़ाई अब जमीन से न्यायालय तक जाएगी
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है। उनका कहना है कि यदि उनकी आपत्तियों और अधिकारों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे लोकतांत्रिक और कानूनी रास्ते से संघर्ष को आगे बढ़ाएंगे और यह लड़ाई जमीन से लेकर न्यायालय तक जाने की बात कही।दुर्गापुर की इस बैठक के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या SECL और प्रशासन ग्रामीणों की सामूहिक आपत्ति को गंभीरता से लेते हुए कोई समाधान निकालेंगे, या फिर प्रस्तावित कोल ब्लॉक के खिलाफ आदिवासी समाज का आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेगा?



