अडानी कोल ब्लॉक के खिलाफ ग्रामीणों का बिगुल: 621 हेक्टेयर वन भूमि बचाने की लड़ाई तेज, जनसुनवाई पहले ही हो चुकी स्थगित#देखे वीडियो#

धरमजयगढ़ (रायगढ़)।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स (अडानी) के पुरुंगा भूमिगत कोल ब्लॉक के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। अब ग्राम पंचायत पुरुंगा, साम्हरसिंघा और तेंदुमुड़ी के समस्त ग्रामीणों ने एकजुट होकर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार को सशक्त आपत्ति पत्र भेजते हुए 621.331 हेक्टेयर वन भूमि परिवर्तन प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग की है ग्रामीणों ने यह आवेदन वनमंडलाधिकारी, वन मंडल धरमजयगढ़ के माध्यम से भेजा है, जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि अंबुजा सीमेंट्स (अडानी) द्वारा प्रस्तुत आवेदन (संख्या FP/CG/MIN/CRE/545974/2025, दिनांक 25 जुलाई 2025) क्षेत्र के पर्यावरण, वन्यजीव और आदिवासी अधिकारों के लिए गंभीर खतरा है।
ग्राम सभाओं ने पहले ही कर दिया है खारिज
ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां बिना ग्राम सभा की अनुमति कोई भी खनन कार्य वैध नहीं है।तीनों ग्राम पंचायतों—तेंदुमुड़ी (18 अक्टूबर 2025)साम्हरसिंघा (19 अक्टूबर 2025)
पुरुंगा (19 अक्टूबर 2025)में आयोजित ग्राम सभाओं में इस कोल ब्लॉक प्रस्ताव का सर्वसम्मति से विरोध करते हुए निरस्तीकरण का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है।
हाथियों का घर उजड़ने का खतरा
ग्रामीणों के अनुसार प्रस्तावित क्षेत्र में लगभग 314 हेक्टेयर आरक्षित वन शामिल है, जो जैव विविधता से भरपूर है। यह इलाका जंगली हाथियों का स्थायी निवास क्षेत्र बन चुका है, जहां सालभर उनका विचरण होता है।खनन कार्य शुरू होने पर हाथियों और अन्य वन्यजीवों के जीवन पर सीधा खतरा मंडराएगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका है।
भूमिगत खनन भी नहीं है सुरक्षित
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि भले ही खनन भूमिगत हो, लेकिन भारी मशीनों, ड्रिलिंग और विस्फोट से ध्वनि प्रदूषण, भूमि धंसान और पर्यावरणीय असंतुलन उत्पन्न होगा, जिसका असर जंगल और आसपास के गांवों पर पड़ेगा।जल, जंगल, जमीन पर सीधा असर वन भूमि परिवर्तन से स्थानीय जल स्रोत, खेती-किसानी, आजीविका और आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों ने इसे अपने अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा बताते हुए आंदोलन को और तेज करने का संकेत दिया है।
भारी विरोध के बाद जनसुनवाई स्थगित
ज्ञात हो कि इससे पहले भी क्षेत्र में अडानी समूह की कोयला खदान के खिलाफ ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। इसी के चलते प्रस्तावित जनसुनवाई को शासन द्वारा स्थगित करना पड़ा था, जो ग्रामीण एकता की बड़ी जीत मानी जा रही है।
वन मंत्रालय से अंतिम अपील
ग्रामीणों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वन भूमि परिवर्तन प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए हाथियों के आवास और घने जंगलों को संरक्षित रखा जाए,आदिवासी हितों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाएग्रामीणों का कहना है कि अगर उनकी मांगों को अनदेखा किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।



