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हवाई सर्वे हो या जमीनी,अडानी को एक इंच जमीन नहीं देंगे— हाथियों के रहवास जंगल बचाने ग्रामवासियों का ऐलान#हवाई सर्वे का देखे वीडियो#

धरमजयगढ़ न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट

धरमजयगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत पुरुंगा में प्रस्तावित मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स (अडानी) पुरुंगा भूमिगत कोल ब्लॉक को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों में हलचल तेज हो गई है। लगभग दोपहर 3 बजे सामरसिंघा, तेंदूमुड़ी और पुरुंगा गांव के ऊपर एक छोटा हवाई जहाज चक्कर लगाते देखा गया। इसे लेकर ग्रामीणों में चर्चा का दौर शुरू हो गया और कई लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया ग्रुपों में साझा किया,ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिन पहले धरमजयगढ़ वन मंडल और बिलासपुर वन विभाग की टीम अडानी कंपनी के कर्मचारियों के साथ सर्वे के लिए पहुंची थी,

जिन्हें ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए जंगल से वापस लौटा दिया था। ऐसे में अचानक गांव के ऊपर हवाई जहाज की परिक्रमा से संदेह और चर्चाएं तेज हो गई हैं।कोई इसे वन विभाग के उच्च अधिकारियों का हवाई निरीक्षण बता रहा है, तो कोई दिल्ली से जांच टीम आने की संभावना जता रहा है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा कि संभवतः कंपनी प्रबंधन द्वारा हवाई सर्वे कराया जा रहा है।

गांव में तरह-तरह की अटकलों के बीच एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई — ग्रामीण अपने जंगल और हाथियों के प्राकृतिक रहवास को बचाने के लिए पूरी तरह संगठित हैं।

869 हेक्टेयर भूमि चिन्हांकित, 621 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित

प्रस्तावित कोल ब्लॉक की निर्धारित क्षमता 2.25 एमटीपीए बताई जा रही है। इसके लिए कुल 869.025 हेक्टेयर भूमि चिन्हांकित की गई है, जिसमें से 621.331 हेक्टेयर वन भूमि है। इसमें 314 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र भी शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र जंगली हाथियों का पारंपरिक आवास है और खनन से उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

ग्रामसभा का स्पष्ट प्रस्ताव: जनसुनवाई निरस्त करो

बीते 11 नवंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों ने विशेष ग्रामसभा आयोजित कर सर्वसम्मति से जनसुनवाई निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया था। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर सहित संबंधित विभागों को ज्ञापन सौंपते हुए भारी विरोध दर्ज कराया,इतना ही नहीं, जनसुनवाई से पूर्व तीन दिनों तक ग्रामीणों ने अलग-अलग रास्तों को बंद कर तीन मुख्य सड़कों पर चक्का जाम कर दिया था, जिससे कोई भी जनसुनवाई स्थल तक न पहुंच सके। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए जनसुनवाई को स्थगित कर दिया था।

पांचवीं अनुसूची क्षेत्र और पेसा कानून का हवाला

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है तथा यहां पेसा कानून 2022 लागू है। ग्रामसभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की परियोजना लागू नहीं की जा सकती। ग्रामीणों का कहना है कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के तहत वे अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा करेंगे,हाथियों का घर उजड़ने नहीं देंगे गांव में बैठकों का दौर फिर से शुरू हो गया है। ग्रामीण एक स्वर में कह रहे हैं—हवाई सर्वे हो या जमीनी सर्वे, हम अपने हाथियों के आरक्षित जंगल को सुरक्षित रखेंगे।
अडानी को अपने क्षेत्र में पैर नहीं पसारने देंगे, चाहे इसके लिए हमें कहीं भी जाना पड़े,ग्रामीणों का यह आंदोलन अब केवल जमीन का नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों के अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का प्रतीक बनता जा रहा है,धरमजयगढ़ के जंगलों में एक बार फिर जनसंगठन की आवाज गूंज रही है —जल, जंगल और जमीन हमारी है, इसे बचाना जिम्मेदारी हमारी है।

Sajal Kumar Madhu

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