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हाथियों के जंगल में कोयला नीलामी के खिलाफ ग्राम सभा का बड़ा ऐलान, नवागांव ईस्ट-वेस्ट कोल ब्लॉक रद्द करने की मांग

180 ग्रामीणों और 75 हाथियों की मौत के आंकड़ों का हवाला देकर उठाए सवाल, ग्राम सभा के सर्वसम्मत प्रस्ताव के साथ कोयला मंत्रालय, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

धरमजयगढ़ हेड/छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वनांचल में प्रस्तावित कोयला खदानों की नीलामी को लेकर विरोध तेज हो गया है। ग्राम पंचायत नवागांव की ग्राम सभा ने 5 अक्टूबर 2026 को आयोजित बैठक में नवागांव ईस्ट एवं नवागांव वेस्ट कोल ब्लॉक की प्रस्तावित नीलामी और खनन गतिविधियों के विरोध में सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया है। ग्राम सभा के इस प्रस्ताव के आधार पर भारत सरकार के कोयला मंत्रालय से दोनों कोल ब्लॉकों की नीलामी तत्काल निरस्त करने तथा खनन से संबंधित समस्त कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है।

हाथी कॉरिडोर, घने जंगल और मानव-हाथी संघर्ष बना विरोध का प्रमुख आधार

ग्राम सभा ने अपने प्रस्ताव और ज्ञापन में क्षेत्र के घने जंगलों, जंगली हाथियों के आवागमन मार्ग, प्राकृतिक आवास, जलस्रोत, कृषि भूमि और ग्रामीणों की आजीविका पर कोयला खनन से पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि धरमजयगढ़ और छाल वन परिक्षेत्र हाथियों की आवाजाही और रहवास के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनन, जंगलों की कटाई, भूमि उत्खनन, ब्लास्टिंग तथा भारी वाहनों की आवाजाही से मानव-हाथी संघर्ष और बढ़ने की आशंका है।ग्राम सभा ने स्पष्ट किया है कि जल, जंगल और जमीन की कीमत पर कोयला खनन स्वीकार्य नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार जंगल और प्राकृतिक संसाधन केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका, परंपरा और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान के आधार हैं।

180 ग्रामीणों और 75 हाथियों की मौत के आंकड़ों का हवाला

ज्ञापन में धरमजयगढ़ वन मंडल में मानव-हाथी संघर्ष की गंभीर स्थिति को रेखांकित करते हुए ग्रामीणों और हाथियों की मौत के आंकड़ों का हवाला दिया गया है। प्रस्तुत विवरण के अनुसार, 21 दिसंबर 2001 से 5 जून 2026 तक जंगली हाथियों के हमलों एवं कुचलने की घटनाओं में 180 ग्रामीणों की मृत्यु हुई, जबकि 3 दिसंबर 2005 से 5 जून 2026 तक विभिन्न कारणों से 75 हाथियों की मौत दर्ज होने की बात कही गई है।ज्ञापन में छाल वन परिक्षेत्र में अब तक 64 ग्रामीणों की मृत्यु और 38 हाथियों की मौत का भी उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों ने इन आंकड़ों को गंभीर मानते हुए सवाल उठाया है कि जब क्षेत्र पहले से ही मानव-हाथी संघर्ष से प्रभावित है, तब यहां और अधिक कोयला खनन गतिविधियों को बढ़ावा देना वन्यजीवों तथा स्थानीय आबादी की सुरक्षा के लिए कितना उचित होगा।इन आंकड़ों का आधिकारिक अभिलेखों से सत्यापन संबंधित विभागों द्वारा किया जाना आवश्यक है।

पांचवीं अनुसूची और ग्राम सभा के अधिकारों का भी उठाया मुद्दा

ग्राम सभा ने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची तथा पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 यानी पेसा कानून का उल्लेख किया है। ग्रामीणों का कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय परंपराओं, सामुदायिक संसाधनों और आदिवासी समुदायों के हितों की रक्षा को विशेष महत्व दिया गया है।ग्राम सभा के सर्वसम्मत प्रस्ताव को आधार बनाते हुए मांग की गई है कि स्थानीय समुदाय की आपत्तियों को महज औपचारिकता न माना जाए, बल्कि संबंधित निर्णयों में ग्राम सभा के अधिकारों और क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों का गंभीरता से संज्ञान लिया जाए।

धरमजयगढ़ और छाल के 17 प्रस्तावित कोल ब्लॉकों पर भी चिंता

ज्ञापन में ग्रामीणों ने धरमजयगढ़ और छाल वन परिक्षेत्र में प्रस्तावित कुल 17 कोल ब्लॉकों को लेकर भी चिंता जताई है। ज्ञापन के अनुसार, इन क्षेत्रों में कोयला खनन की संभावित गतिविधियां घने जंगलों और हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा सकती हैं। ग्रामीणों ने पूर्व में 29 दिसंबर 2025 को भी अनुविभागीय अधिकारी, धरमजयगढ़ के माध्यम से कोयला मंत्रालय और वन मंत्रालय, भारत सरकार को पत्राचार किए जाने का उल्लेख किया है।ज्ञापन में छाल और धरमजयगढ़ वन परिक्षेत्र के 36,041.711 हेक्टेयर क्षेत्र को संरक्षित रखने तथा प्रस्तावित कोल ब्लॉकों की नीलामी पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई है। साथ ही पूर्व में नीलामी या आवंटन की प्रक्रिया में शामिल बताए गए विभिन्न कोल ब्लॉकों की समीक्षा कर उन्हें निरस्त करने की मांग की गई है।

ग्राम सभा की पांच प्रमुख मांगें

ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई है कि:

  1. नवागांव ईस्ट एवं नवागांव वेस्ट कोल ब्लॉक की प्रस्तावित नीलामी तत्काल निरस्त की जाए।
  2. दोनों कोल ब्लॉकों से संबंधित नीलामी, आवंटन, सर्वेक्षण, अन्वेषण, भूमि संबंधी कार्रवाई और खनन प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
  3. हाथियों के आवागमन मार्गों, रहवास क्षेत्रों और संभावित हाथी कॉरिडोर की स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
  4. वन्यजीव विशेषज्ञों और स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्थाओं से अध्ययन कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
  5. ग्राम सभा के प्रस्ताव, आपत्तियों और वैधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए की गई कार्रवाई की लिखित सूचना ग्राम पंचायत नवागांव को दी जाए।

कोयला मंत्रालय से लेकर राज्यपाल तक पहुंचाई गई मांग

ग्राम सभा के प्रस्ताव के साथ तैयार ज्ञापन दिनांक 9 अक्टूबर 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), धरमजयगढ़ के माध्यम से कोयला मंत्रालय, भारत सरकार को संबोधित किया गया है। इस मामले में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार तथा छत्तीसगढ़ के राज्यपाल को भी ज्ञापन भेजे जाने की जानकारी दी गई है। ज्ञापन के साथ ग्राम सभा का सर्वसम्मत प्रस्ताव, उपस्थित सदस्यों की हस्ताक्षर सूची तथा हाथियों और मानव जनहानि से संबंधित सूचियां संलग्न किए जाने का उल्लेख है।ग्रामीणों की मांग है कि सरकार कोयला नीलामी से संबंधित निर्णय लेते समय क्षेत्र की पारिस्थितिकी, हाथियों की सुरक्षा, आदिवासी समुदायों के अधिकारों और स्थानीय लोगों की आजीविका को प्राथमिकता दे।

अब निगाहें केंद्र सरकार के निर्णय पर*

नवागांव ग्राम सभा के सर्वसम्मत प्रस्ताव ने धरमजयगढ़ क्षेत्र में कोयला खनन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के प्राकृतिक आवास और जंगलों की सुरक्षा के बिना क्षेत्र का सुरक्षित भविष्य संभव नहीं है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार ग्राम सभा की मांगों और प्रस्तुत तथ्यों पर क्या निर्णय लेती है।

Sajal Kumar Madhu

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