धरमजयगढ़ कालोनी में SECL के खिलाफ किसानों का आक्रोश चरम पर, जनसभा से उठी हुंकार#देखे वीडियो#

11 सितंबर को धरमजयगढ़ क्लब ग्राउंड में जुटेगा किसानों का जनसैलाब, ‘एक इंच जमीन भी नहीं देंगे’ का लिया संकल्प
धरमजयगढ़। दुर्गापुर-शाहपुर प्रस्तावित SECL कोल ब्लॉक के विरोध में किसानों और प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2016 में कोयला मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित लगभग 1,677 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले इस कोल ब्लॉक को लेकर क्षेत्र के किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कोयला खनन से उनकी कृषि भूमि, जंगल और आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा होगा।
SECL कोल ब्लॉक के विरोध को देखते हुए बीते दिनों जिला कलेक्टर के सभाकक्ष में त्रिपक्षीय बैठक भी आयोजित की गई थी। हालांकि, बैठक में कोई ठोस पहल सामने नहीं आने से प्रभावित किसानों ने अब आंदोलन को व्यापक रूप देने की रणनीति तैयार कर ली है।
इसी कड़ी में 26 अगस्त 2026 को ग्राम पंचायत दुर्गापुर बस्ती में किसानों की पहली बड़ी सभा आयोजित की गई थी। सभा में आदिवासी किसानों ने अपनी परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार नारियल, अगरबत्ती एवं चावल से देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर SECL के विरोध में संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अपनी एक इंच भी जमीन SECL को नहीं देंगे।
सभा में यह भी निर्णय लिया गया था कि प्रभावित गांवों में लगातार बैठकें आयोजित कर किसानों और ग्रामीणों को आंदोलन से जोड़ा जाएगा। इसी निर्णय के तहत 3 सितंबर को धरमजयगढ़ कॉलोनी में SECL कोल ब्लॉक के विरोध में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में किसान और प्रभावित ग्रामीण शामिल हुए। और SECL के हर गतिविधियों का विरोध करने का जिक्र करते हुए सर्वे कार्य का भी पुरजोर विरोध करने की बात सामने देखा गया।
कृषि क्षेत्र की पहचान खत्म होने का खतरा
बैठक में क्षेत्रीय किसान दिलीप मिश्रा ने कहा कि बंग समाज के किसान वर्षों से खेती-किसानी पर निर्भर हैं। क्षेत्र में उत्पादित तरबूज और मक्का जैसी फसलों का अन्य राज्यों के अलग-अलग जिलों में निर्यात किया जाता है। यदि क्षेत्र में कोयला खनन शुरू होता है तो कृषि भूमि लगातार कम होगी और किसानों की संख्या में भी भारी कमी आएगी। इससे क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होगी।उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन बचाने की लड़ाई नहीं है, बल्कि किसानों की आने वाली पीढ़ियों, खेती, जंगल और क्षेत्र के अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है। किसानों की आवाज अब गांवों तक सीमित नहीं रहेगी। बल्कि कोर्ट से लेकर मुख्यमंत्री और शासन-प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी।
11 सितंबर को क्लब ग्राउंड में बड़ी रैली और आमसभा
बैठक में किसानों ने आगामी 11 सितंबर को धरमजयगढ़ के क्लब ग्राउंड में विशाल रैली और आमसभा आयोजित करने का निर्णय लिया। किसानों का कहना है कि इस सभा के माध्यम से SECL कोल ब्लॉक के विरोध में अपनी एकजुट आवाज शासन और प्रशासन तक पहुंचाई जाएगी।
बैठक के दौरान आंदोलन के लिए होने वाले खर्च को लेकर भी चर्चा हुई। जब किसानों के बीच यह बात सामने आई कि रैली, आमसभा और आंदोलन में खर्च आएगा, तो सभा के बीच एक डिब्बा रखकर सभी से अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग देने की अपील की गई। इसके बाद किसानों ने खुलकर सामने आते हुए स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग किया।इस दौरान किसानों की एकजुटता और आंदोलन के प्रति उनका संकल्प साफ दिखाई दिया। किसानों का कहना है कि जमीन हमारी है, खेती हमारी है और भविष्य भी हमारा है—इसलिए अपने अधिकारों की लड़ाई भी हम ही लड़ेंगे।अब निगाहें 11 सितंबर पर टिकी हैं। किसानों के लगातार बढ़ते विरोध और गांव-गांव हो रही बैठकों को देखते हुए आगामी रैली और आमसभा में बड़ी संख्या में किसानों एवं प्रभावित ग्रामीणों के जुटने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में धरमजयगढ़ क्लब ग्राउंड से उठने वाली किसानों की आवाज शासन-प्रशासन तक किस रूप में पहुंचती है, यह देखने वाली बात होगी।



