वैश्विक युद्ध का असर: छत्तीसगढ़ में निर्माण कार्य ठप होने की कगार पर, ठेकेदारों ने मांगा राहत पैकेज

धरमजयगढ़ हेड/नवा रायपुर/छत्तीसगढ़, 06 अप्रैल 2026
विश्व स्तर पर चल रहे भीषण युद्ध, विशेष रूप से इज़राइल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब छत्तीसगढ़ के निर्माण कार्यों पर दिखाई देने लगा है। निर्माण सामग्रियों की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि और पेट्रोलियम उत्पादों की कमी के कारण प्रदेश में कई परियोजनाएं धीमी पड़ गई हैं, जबकि कुछ कार्य लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच चुके हैं।बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) के प्रदेश अध्यक्ष रूपेश कुमार सिंघल ने प्रमुख अभियंता,PWD विभाग को पत्र लिखकर इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया है और तत्काल राहत की मांग की है।

निर्माण कार्यों पर पड़ा गहरा असर
एसोसिएशन के अनुसार पिछले एक महीने में हालात तेजी से बिगड़े हैं। मुख्य समस्याएं इस प्रकार हैं डीज़ल, बिटुमेन, इमल्शन सहित पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि स्टील और सीमेंट जैसे आवश्यक निर्माण सामग्रियों के दामों में तेज उछाल

ईंधन की कमी से मशीनरी संचालन और उत्पादकता पर असर
बिटुमेन (डामर) की आपूर्ति में भारी कमीपांच राज्यों में चुनाव के कारण मजदूरों की उपलब्धता घटी इन कारणों से निर्माण कार्यों की गति अत्यंत धीमी हो गई है और कई प्रोजेक्ट ठप पड़ने के कगार पर हैं।

ठेकेदारों के नियंत्रण से बाहर हालात
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति पूरी तरह ठेकेदारों के नियंत्रण से बाहर है और इसे “हिंड्रेन्स” (बाधा) की श्रेणी में माना जाना चाहिए, जो सीधे कार्य निष्पादन को प्रभावित कर रही है।
शासन से की गई प्रमुख मांगें
बिल्डर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए निम्न राहत प्रदान करने की मांग की है:1. प्रभावित अवधि के लिए बिना पेनाल्टी समय वृद्धि (EOT) दी जाए 2 बढ़ी हुई दरों के अनुसार अतिरिक्त क्षतिपूर्ति (कंपनसेशन) स्वीकृत की जाए 3/फोर्स मेज्योर, मूल्य समायोजन एवं बाधा प्रावधानों के तहत राहत दी जाए 4 /जिन अनुबंधों में एस्केलेशन का प्रावधान नहीं है, उनमें भी विशेष अनुमति से भुगतान किया जाए राहत पैकेज के बिना काम संभव नहीं प्रदेश अध्यक्ष रूपेश कुमार सिंघल ने कहा कि यदि शीघ्र राहत पैकेज जारी नहीं किया गया, तो निर्माण कार्यों को जारी रखना संभव नहीं होगा। इससे न केवल परियोजनाएं प्रभावित होंगी बल्कि राज्य की विकास गति पर भी गंभीर असर पड़ेगा।

केंद्र और राज्य को भेजा गया पत्र
इस संबंध में आवेदन पत्र देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और छत्तीसगढ़ शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजा गया है, ताकि इस गंभीर विषय पर शीघ्र संज्ञान लिया जा सके।अब देखना यह है कि शासन इस संकट पर कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देता है और निर्माण उद्योग को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।



