हाथियों के रहवास पर कोल ब्लॉक का खतराधरमजयगढ़ में 18 कोयला खदानों के विरोध में एक किलोमीटर का लंबी रैली उमड़ा जनसैलाब#देखे वीडियो#
5वीं अनुसूची क्षेत्र में खनन पर रोक की मांग, 6 कोल ब्लॉक निरस्त व 12 की नीलामी पर तत्काल रोक लगाने की अपील
धरमजयगढ़ (रायगढ़)।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले अंतर्गत धरमजयगढ़ वन मण्डल के छाल एवं धरमजयगढ़ रेंज में प्रस्तावित कोल ब्लॉकों के विरोध में आदिवासी समाज का आक्रोश फूट पड़ा। जंगली हाथियों के प्रमुख रहवास क्षेत्र और घने जंगलों को बचाने की मांग को लेकर,आयोजित आमसभा व रैली में 5 हजार से अधिक ग्रामीणों ने एकजुट होकर सरकार से कोल ब्लॉकों को निरस्त करने की मांग की,धरमजयगढ़ वन मण्डल का कुल वन क्षेत्र 1,71,341.9 हेक्टेयर है, जिसमें से छाल और धरमजयगढ़ रेंज का 36,041.771 हेक्टेयर घना वन क्षेत्र जंगली हाथियों का स्थायी विचरण क्षेत्र बन चुका है। इन दोनों रेंजों में 52 आदिवासी ग्राम पंचायतें स्थित हैं, जो पांचवीं अनुसूची एवं पेसा कानून 1996 के अंतर्गत आती हैं।
हाथी–मानव संघर्ष के चौंकाने वाले आंकड़े
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2001 से अब तक हाथियों के कुचलने से 167 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 113 मौतें केवल छाल और धरमजयगढ़ रेंज में हुई हैं। वहीं वर्ष 2005 से अब तक 63 जंगली हाथियों की मौत हो चुकी है, जिनमें 54 हाथियों की मृत्यु इन्हीं दोनों रेंजों में दर्ज की गई है। इससे क्षेत्र की संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
18 कोल ब्लॉक, जंगल और हाथियों पर सीधा खतरा
छाल व धरमजयगढ़ रेंज में कुल 18 ओपन कोल ब्लॉक चिन्हांकित किए गए हैं, जिनमें से 6 कोल ब्लॉक की नीलामी पहले ही की जा चुकी है। इनमें दुर्गापुर-सारिया, तराईमार (कर्नाटक पावर), शेरबन, दुर्गापुर-शाहपुर (SECL), पुरूंगा (अडानी) और बायसी शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ओपन कास्ट खनन से जंगल नष्ट होंगे, हाथियों के रास्ते टूटेंगे और मानव–हाथी संघर्ष और भयावह होगा।
मांड नदी पर भी मंडराया संकट
क्षेत्र से होकर लगभग 50 किलोमीटर तक बहने वाली मांड नदी सालभर पानी उपलब्ध कराती है, जिस पर हाथी समेत तमाम वन्यजीव निर्भर हैं। कोल खनन से निकलने वाली धूल और अपशिष्ट से नदी के भारी प्रदूषित होने का खतरा जताया गया है, जिससे वन्यजीवों के स्वास्थ्य और अस्तित्व पर संकट गहरा सकता है।
हाथी प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग
ग्रामीणों ने छाल और धरमजयगढ़ रेंज को “हाथी प्रभावित एवं आरक्षित क्षेत्र” घोषित करने, लेमरू परियोजना के तहत चल रहे हाथी सुरक्षा कार्यों को और मजबूत करने तथा जंगलों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत सुरक्षित करने की मांग की।
इन प्रमुख हस्तियों को भेजा गया ज्ञापन
इस मांग को लेकर ज्ञापन केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य, छत्तीसगढ़ शासन के वन मंत्री केदार कश्यप, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी एवं माननीय राष्ट्रपति को भेजा गया है।
ग्रामीणों का स्पष्ट चेतावनी
ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि यदि 6 कोल ब्लॉक निरस्त नहीं किए गए और शेष 12 कोल ब्लॉक की नीलामी पर तत्काल रोक नहीं लगी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



