राज्यसभा में गूंजा हसदेव का मुद्दा:जहां अरबों के संसाधन, वहां के लोग क्यों गरीब?

AAP सांसद संदीप पाठक ने उठाए भू-अधिग्रहण, ग्रामसभा की सहमति और DMF फंड के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल
धरमजयगढ़/नई दिल्ली/रायपुर
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और छत्तीसगढ़ प्रभारी संदीप पाठक ने राज्यसभा में छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाते हुए केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान वहां के आदिवासी और ग्रामीण समुदायों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया।डॉ. पाठक ने सदन में कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि जहां अरबों रुपये के प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं, वहीं वहां रहने वाले लोग आज भी गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि “जहां इतनी बड़ी संपदा है, वहां के लोग आखिर गरीब क्यों हैं,उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कानून का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। ग्राम सभाओं की सहमति को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और आदिवासी अधिकारों के खिलाफ है।

डॉ. पाठक ने कहा कि जो ग्रामीण अपनी जमीन देने के लिए सहमति नहीं देते, उनके घरों पर रात के अंधेरे में दबिश दी जाती है और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की जाती है। विरोध करने वाले ग्रामीणों को कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर प्रताड़ित किए जाने का भी आरोप उन्होंने लगाया।उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय लोगों को रोजगार देने के नाम पर स्थायी और सम्मानजनक नौकरी देने के बजाय उन्हें मजदूरी तक सीमित कर दिया गया है।राज्यसभा सांसद ने जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) फंड के उपयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस फंड का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो रहा है, जबकि इसका उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।
डॉ. पाठक ने कहा कि जब व्यवस्था लोगों की समस्याओं को सुनने और न्याय देने में विफल होती है, तो असंतोष बढ़ता है और कई बार लोग गलत रास्ते की ओर धकेल दिए जाते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण, ग्राम सभा की सहमति और DMF फंड के उपयोग की निष्पक्ष जांच कराई जाए और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।



