जल-जंगल-जमीन की कीमत पर कोयला मंजूर नहीं नवागांव ईस्ट-वेस्ट कोल ब्लॉक की नीलामी रोकने का सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित

हाथी कॉरिडोर और मानव-हाथी संघर्ष का हवाला देते हुए खनन की समस्त कार्रवाई तत्काल रोकने की मांग
धरमजयगढ़, 5 अक्टूबर 2026।
धरमजयगढ़ क्षेत्र के नवागांव में सोमवार को आयोजित ग्राम सभा की बैठक में प्रस्तावित नवागांव ईस्ट एवं नवागांव वेस्ट कोल ब्लॉक की नीलामी और उससे संबंधित खनन गतिविधियों के खिलाफ ग्रामवासियों ने कड़ा रुख अपनाया। ग्राम सभा ने दोनों कोल ब्लॉकों की प्रस्तावित नीलामी पर तत्काल रोक लगाने तथा ग्राम सभा के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने संबंधी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया।ग्राम सभा में चर्चा के दौरान बताया गया कि कोयला मंत्रालय द्वारा नीलामी के लिए जारी सूची में छत्तीसगढ़ के पांच कोल ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र स्थित नवागांव ईस्ट और नवागांव वेस्ट भी शामिल हैं। ग्राम सभा के अनुसार दोनों ब्लॉकों का क्षेत्रफल क्रमशः लगभग 14.06 वर्ग किलोमीटर और 9.42 वर्ग किलोमीटर बताया गया है। प्रस्ताव में तकनीकी बोलियां 10 नवंबर 2026 को खोले जाने तथा ई-ऑक्शन 3 से 10 दिसंबर 2026 के बीच प्रस्तावित होने का उल्लेख किया गया है।
पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ग्राम सभा के अधिकारों की अनदेखी नहीं
ग्राम सभा ने अपने प्रस्ताव में क्षेत्र को संविधान के अनुच्छेद 244(1) के तहत पांचवीं अनुसूची क्षेत्र बताते हुए कहा कि यहां अनुसूचित जनजातियों, सामुदायिक संसाधनों, परंपरागत अधिकारों और स्थानीय समुदाय के हितों की विशेष संवैधानिक सुरक्षा है।
ग्राम सभा ने PESA अधिनियम, वनाधिकार अधिनियम तथा वन एवं वन्यजीव संरक्षण संबंधी कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय समुदाय के अधिकारों और ग्राम सभा की भूमिका की अनदेखी कर किसी भी खनन परियोजना को आगे बढ़ाना स्वीकार्य नहीं होगा।
हाथियों की मौत और मानव-हाथी संघर्ष पर जताई गंभीर चिंता
प्रस्ताव में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। ग्राम सभा के अनुसार नवागांव ईस्ट एवं वेस्ट कोल ब्लॉक का क्षेत्र धरमजयगढ़ वनमंडल के धरमजयगढ़ रेंज से जुड़ा है और यह क्षेत्र हाथियों के आवागमन एवं रहवास के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
ग्राम सभा में रखे गए आंकड़ों के अनुसार इस रेंज में अब तक 26 हाथियों की मौत तथा 52 ग्रामीणों की हाथियों के हमले/कुचलने से मौत हुई है। प्रस्ताव में क्रोंधा–रुपुंगा हाथी कॉरिडोर/प्रभावित क्षेत्र से संबंधित अभिलेखों का भी उल्लेख किया गया है।ग्राम सभा का कहना है कि बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई, भूमि उत्खनन, ब्लास्टिंग, भारी वाहनों का आवागमन, धूल और शोर से हाथियों के प्राकृतिक आवास एवं आवागमन मार्ग प्रभावित होंगे तथा मानव-हाथी संघर्ष और बढ़ सकता है।
कोल ब्लॉक की नीलामी किसी भी कीमत पर नहीं
ग्राम सभा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जल, जंगल और जमीन की कीमत पर कोयला खनन स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रस्ताव में प्राकृतिक जंगल, नदी-नाले, जलस्रोत, कृषि भूमि, चराई भूमि, सामुदायिक भूमि, लघु वनोपज, वन्यजीव आवास और हाथियों के आवागमन मार्गों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया गया है।ग्राम सभा ने मांग की है कि दोनों कोल ब्लॉकों की प्रस्तावित नीलामी तत्काल स्थगित की जाए तथा ग्राम सभा के प्रस्ताव को रिकॉर्ड पर लिए बिना किसी भी प्रकार का सर्वेक्षण, भूमि संबंधी कार्रवाई अथवा खनन प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।
हाथी कॉरिडोर की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच की मांग
ग्राम सभा ने क्षेत्र के हाथी कॉरिडोर एवं हाथियों के आवागमन क्षेत्र की स्वतंत्र और वैज्ञानिक जांच कराने तथा वन्यजीव विशेषज्ञों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित ग्राम सभाओं को कोल ब्लॉक से संबंधित नक्शे, क्षेत्रफल, वन भूमि का विवरण, हाथी कॉरिडोर संबंधी रिकॉर्ड, पर्यावरणीय अध्ययन एवं प्रस्तावित खनन योजना सहित सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है।प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि जहां कानून के अनुसार ग्राम सभा की सहमति, अनुशंसा या परामर्श आवश्यक हो, वहां इसे महज औपचारिकता न बनाकर वास्तविक, स्वतंत्र और पारदर्शी ग्राम सभा प्रक्रिया के माध्यम से पूरा किया जाए।
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे की लड़ाई का ऐलान
ग्राम सभा ने अपने अंतिम संकल्प में कहा कि विकास के नाम पर स्थानीय समुदाय के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। पांचवीं अनुसूची, PESA, वनाधिकार तथा वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित कानूनों के अनुरूप ही क्षेत्र के संबंध में कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।
ग्राम सभा ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक संसाधनों और सामुदायिक हितों की रक्षा के लिए वह संविधान एवं कानून के तहत उपलब्ध सभी वैधानिक उपायों का इस्तेमाल करने का अधिकार सुरक्षित रखती है।बैठक के अंत में प्रस्ताव को ग्राम सभा के समक्ष पढ़कर सुनाया गया। चर्चा के बाद उपस्थित ग्राम सभा सदस्यों ने इसे सर्वसम्मति से पारित किया। ग्राम सभा का स्पष्ट संदेश रहा—“जल, जंगल, जमीन और वन्यजीवों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।



