भारत माला 130 A जमीन अधिग्रहण पर घमासान!पुरानी कलेक्टर गाइडलाइन से मुआवजा मंजूर नहीं, प्रभावित किसानों ने नई दरों से भुगतान की उठाई मांग#देखे वीडियो

भारत माला 130 के लिए अधिग्रहित जमीन का मामला गरमाया, 21 फरवरी 2026 को प्रकाशन तिथि मानने की मांग
धरमजयगढ़। राष्ट्रीय राजमार्ग भारतमाला परियोजना-130 के तहत किमी 114.410 से किमी 121.450 तक लगभग 7.04 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की जा रही निजी भूमि के मुआवजा निर्धारण को लेकर भू-स्वामियों ने प्रशासन के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत किया है। भू-स्वामियों ने आरोप लगाया है कि उनकी भूमि के बाजार मूल्य एवं प्रतिकर की गणना वर्ष 2025 की पुरानी कलेक्टर गाइडलाइन दरों के आधार पर की जा रही है, जबकि रायगढ़ जिले में 20 फरवरी 2026 से पुनरीक्षित कलेक्टर गाइडलाइन/सर्किल दरें प्रभावशील हो चुकी थीं।
भू-स्वामियों की ओर से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सह भू-अर्जन अधिकारी, धरमजयगढ़ के समक्ष प्रस्तुत आवेदन में मांग की गई है कि मुआवजे की गणना नई प्रभावशील गाइडलाइन दरों के आधार पर की जाए तथा प्रत्येक खसरा नंबर के लिए प्रभावित रकबा, लागू दर, गुणन कारक, 100 प्रतिशत सोलैटियम एवं ब्याज सहित पारदर्शी विस्तृत गणना पत्रक उपलब्ध कराया जाए।
21 फरवरी को प्रकाशन को आधार तिथि मानने की मांग
अभ्यावेदन में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3A के तहत प्रारंभिक अधिसूचना भारत के राजपत्र में 17 फरवरी 2026 को प्रकाशित हुई थी, जबकि स्थानीय समाचार पत्रों में इसका प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को हुआ। भू-स्वामियों का मुख्य विधिक तर्क है कि समाचार पत्रों में आवश्यक प्रकाशन की अंतिम तिथि 21 फरवरी होने के कारण बाजार मूल्य निर्धारण के लिए इसी तारीख को आधार माना जाना चाहिए।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि 20 फरवरी 2026 से नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू हो चुकी थी। ऐसे में 21 फरवरी को प्रभावी नई दरों के स्थान पर पुरानी दरों से मुआवजा निर्धारित करना भू-स्वामियों के आर्थिक हितों को प्रभावित करेगा।

नोटिस पर भी उठाए सवाल
भू-स्वामियों ने 8 सितंबर 2026 को जारी नोटिस पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि नोटिस में प्रत्येक खातेदार की अधिग्रहित भूमि का स्पष्ट खसरा नंबर, रकबा, लागू बाजार दर, प्रतिकर राशि और विस्तृत गणना पत्रक उपलब्ध नहीं कराया गया। आवेदन में मांग की गई है कि विस्तृत गणना पत्रक दिए जाने और उस पर आपत्ति प्रस्तुत करने का उचित अवसर मिलने से पहले कोई एकपक्षीय कार्रवाई नहीं की जाए।
आरएफसीटीएलएआर अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
अभ्यावेदन में Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 की धारा 26, धारा 30 तथा प्रथम अनुसूची सहित राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के प्रावधानों का हवाला दिया गया है। साथ ही Union of India v. Tarsem Singh, (2019) 9 SCC 304 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग भूमि अधिग्रहण में प्रतिकर से जुड़े वैधानिक लाभों की मांग की गई है।
भू-स्वामियों ने यह भी कहा है कि भूमि का क्षेत्र धरमजयगढ़ नगरीय क्षेत्र, राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रस्तावित कोल ब्लॉकों और अन्य विकास गतिविधियों के निकट होने के कारण भविष्य की उपयोगिता एवं बाजार मूल्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसलिए केवल पुरानी कृषि दरों को आधार बनाकर प्रतिकर निर्धारित करने से वास्तविक आर्थिक नुकसान हो सकता है।
अवार्ड से पहले गणना सुधारने की मांग
अभ्यावेदन में प्रशासन से मांग की गई है कि अंतिम अवार्ड पारित करने से पहले पूरी गणना की समीक्षा की जाए और 20 फरवरी 2026 से प्रभावी पुनरीक्षित कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर मुआवजे का पुनर्निर्धारण किया जाए।
भू-स्वामियों ने स्पष्ट रूप से मांग रखी है कि उन्हें प्रत्येक खसरा नंबर के संबंध में विस्तृत गणना पत्रक उपलब्ध कराया जाए, व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया जाए और जब तक उनकी आपत्तियों का विधिवत निराकरण नहीं हो जाता, तब तक 8 सितंबर के नोटिस के आधार पर कोई एकपक्षीय कार्रवाई नहीं की जाए। अभ्यावेदन के साथ मद्रास उच्च न्यायालय के National Highways Authority of India बनाम S. Rudra Devi, W.A. (MD) Nos. 273 & 274 of 2026, दिनांक 06 मार्च 2026 के आदेश सहित अन्य दस्तावेज संलग्न किए जाने का उल्लेख किया गया है।



