5300 टन औद्योगिक अपशिष्ट का दावा, 750 ट्रकों का दबाव और हाथियों का रहवास—चारमार में BS स्पंज की जनसुनवाई रद्द करने उठी आवाज

ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा आपत्ति पत्र, कहा—पहले से प्रदूषण की मार झेल रहे क्षेत्र पर नए उद्योग का अतिरिक्त बोझ मंजूर नहीं
घरघोड़ा/रायगढ़। ग्राम नवापारा (टेण्डा), चारमार, भेंगारी, खोखरोआमा एवं कटंगडीह क्षेत्र में प्रस्तावित मेसर्स बी.एस. स्पंज प्रा.लि. की स्थापना को लेकर ग्रामीणों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर रायगढ़ को आपत्ति पत्र सौंपकर 28 सितंबर 2026 को ग्राम चारमार में प्रस्तावित जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित उद्योग ऐसे क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है, जहां पहले से ही कई औद्योगिक इकाइयों के कारण पर्यावरणीय एवं यातायात का दबाव बना हुआ है। ग्रामीणों ने अपने आपत्ति पत्र में दावा किया है कि प्रस्तावित स्थल के आसपास मेसर्स महावीर एनर्जी 12 मेगावाट, टीआरएन एनर्जी 2×300 मेगावाट तथा फिल कोलवाशरी जैसी इकाइयां संचालित हैं। इनके कारण क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 750 कोयला वाहनों की आवाजाही होने का दावा किया गया है।

पहले से प्रदूषण की मार, अब नए उद्योग का बोझ क्यों?
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मौजूदा औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाली राख, फ्लाई ऐश, धूल, धुआं एवं अन्य अपशिष्ट के कारण आसपास के खेत, जलस्रोत और वन क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि इसका असर कृषि उत्पादन तथा चार, महुआ, तेंदूपत्ता, डोरी, सरई बीज, हर्रा, बहेरा, आंवला सहित अन्य लघु वनोपज पर भी पड़ रहा है।ग्रामीणों ने विशेष रूप से दावा किया है कि क्षेत्र में पहले प्रसिद्ध रही हरी मिर्च की खेती में भी गिरावट आई है और कई किसानों ने खेती छोड़ दी है।
हाथी रहवास और जैव विविधता को लेकर भी सवाल
आपत्ति पत्र में ग्रामीणों ने प्रस्तावित परियोजना के आसपास हाथी आवागमन एवं रहवास क्षेत्र होने का दावा करते हुए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट में वन्यजीवों से संबंधित जानकारी की पर्याप्तता पर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार प्रस्तावित स्थल के समीप रेलवे लाइन, हाथी पास/रहवास से संबंधित संरचनाएं तथा वन क्षेत्र मौजूद हैं। उनका दावा है कि क्षेत्र में लंबे समय से हाथियों की आवाजाही होती रही है और मानव-हाथी संघर्ष के मामलों में वन विभाग द्वारा मुआवजा भी दिया जाता रहा है।ग्रामीणों ने मांग की है कि परियोजना पर निर्णय लेने से पहले हाथी कॉरिडोर, वन्यजीव आवास, जैव विविधता तथा मानव-हाथी संघर्ष के उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड का स्वतंत्र रूप से परीक्षण किया जाए।

भू-गर्भ जल दोहन पर भी गंभीर सवाल
ग्रामीणों ने महावीर एनर्जी से संबंधित गतिविधियों पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि अनुमति की शर्तों के बावजूद लंबे समय से भू-गर्भ जल का दोहन किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे नवापारा, भेंगारी, चारमार और कटंगडीह क्षेत्र के जलस्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि औद्योगिक राख और अपशिष्ट के कारण खेतों एवं जलस्रोतों के प्रदूषित होने की स्थिति बनी है। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित विभागों के अभिलेखों से सत्यापन की मांग भी की गई है।
5300 टन प्रतिदिन अपशिष्ट का प्रबंधन कैसे होगा?
प्रस्तावित बी.एस. स्पंज परियोजना को लेकर ग्रामीणों ने सबसे बड़ा सवाल औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन पर उठाया है। आपत्ति पत्र में परियोजना से प्रतिदिन लगभग 5300 टन अपशिष्ट निकलने का दावा किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि फ्लाई ऐश, स्लैग, धूल, वाटर ऐश एवं अन्य औद्योगिक ठोस अपशिष्ट का वास्तविक और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन नहीं हुआ तो इसका सीधा प्रभाव कृषि भूमि, जलस्रोत, हवा और आसपास के पर्यावरण पर पड़ सकता है।
उनका कहना है कि केवल ईआईए रिपोर्ट में अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था प्रस्तावित कर देना पर्याप्त नहीं है। पहले से संचालित उद्योगों में पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी है।
ईआईए रिपोर्ट पर भी उठाए सवाल
ग्रामीणों ने बी.एस. स्पंज की ईआईए रिपोर्ट में आसपास संचालित उद्योगों, बस्तियों, हाथी आवागमन क्षेत्र और मौजूदा प्रदूषण की स्थिति के पर्याप्त उल्लेख को लेकर सवाल उठाए हैं।
आपत्ति पत्र में ग्रामीणों ने दावा किया है कि प्रस्तावित स्थल के बेहद करीब चारमार (नवाडीह) की बसाहट स्थित है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में पहले से मौजूद औद्योगिक इकाइयों के कारण पर्यावरणीय दबाव का समग्र आकलन किए बिना नई परियोजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
ग्रामीणों ने पूर्व में पर्यावरणीय उल्लंघनों को लेकर की गई कार्रवाई एवं जुर्माने संबंधी दावों की भी जांच की मांग की है।
विकास चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं जो गांव और जंगल छीन ले
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें विकास से विरोध नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर यदि कृषि भूमि, जलस्रोत, जंगल, लघु वनोपज और पारंपरिक आजीविका प्रभावित होती है तो ऐसे औद्योगिक विस्तार पर पुनर्विचार आवश्यक है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि-प्रस्तावित बी.एस. स्पंज परियोजना की ईआईए रिपोर्ट का स्वतंत्र परीक्षण कराया जाए।आसपास के सभी मौजूदा उद्योगों के प्रदूषण एवं पर्यावरणीय अनुपालन की जांच हो।भू-गर्भ जल दोहन की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए।क्षेत्र के हाथी आवागमन एवं वन्यजीव आवास का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए।मौजूदा औद्योगिक एवं यातायात दबाव का संचयी पर्यावरणीय प्रभाव आंका जाए।
प्रस्तावित परियोजना से निकलने वाले औद्योगिक अपशिष्ट की मात्रा और उसके वास्तविक निस्तारण की व्यवस्था स्पष्ट की जाए।
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों का संबंधित विभागों से दस्तावेजी सत्यापन कराया जाए।ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से 28 सितंबर 2026 को ग्राम चारमार में होने वाली प्रस्तावित जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक क्षेत्र में पहले से संचालित उद्योगों के पर्यावरणीय प्रभाव, प्रदूषण, जल दोहन, वन्यजीव और जनजीवन पर पड़ रहे प्रभाव की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती, तब तक नए औद्योगिक प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।ग्रामीणों की मांग अब जिला प्रशासन के समक्ष है कि चारमार में प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर उनके द्वारा उठाए गए पर्यावरण, स्वास्थ्य, जल, कृषि और वन्यजीव संबंधी सवालों का जवाब रिकॉर्ड और वैज्ञानिक जांच के आधार पर दिया जाए।



