54 बार जेल, फिर भी अडिग संघर्ष: ठाकुर राम गुलाम बने छत्तीसगढ़ के जनआंदोलनों की जिंदा मशाल

धरमजयगढ़ हेड/रायपुर
छत्तीसगढ़ी जनसंघर्षों के इतिहास में एक ऐसा नाम, जो दमन, जेल और सत्ता की लाठियों के सामने कभी नहीं झुका—ठाकुर राम गुलाम। 78 वर्ष की उम्र में भी उनका संघर्ष उतना ही जीवंत है, जितना युवावस्था में था। अब तक 54 बार जेल जा चुके ठाकुर राम गुलाम ने यह साबित कर दिया कि आंदोलन उम्र का मोहताज नहीं होता,29 दिसंबर को दीपका स्थित SECL प्रभावित क्षेत्र में आयोजित बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकारों को लेकर चल रहे आंदोलनों को एक साझा मंच पर लाने का फैसला हुआ। यह आंदोलन अब “छत्तीसगढ़ जनआंदोलन” के बैनर तले संचालित होगा,बैठक में तय किया गया कि इस मंच को मजबूत करने के लिए प्रदेशभर में लगातार दौरे किए जाएंगे, ताकि बिखरे संघर्षों को एकजुट कर सरकार और कॉर्पोरेट ताकतों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जा सके,छत्तीसगढ़ क्रांतिसेना के संयोजक ठाकुर राम गुलाम दशकों से आदिवासी अधिकार, किसानों के हक, विस्थापन, खनन और औद्योगिक लूट के खिलाफ संघर्ष की अगुवाई करते रहे हैं। हर गिरफ्तारी ने उनके हौसले को तोड़ने के बजाय और मजबूत किया,उनके साथी कहते हैं—जेल उनके लिए सजा नहीं, जनसंघर्ष का सम्मान बन चुकी है,सरकारें बदलीं, नीतियाँ बदलीं, लेकिन ठाकुर राम गुलाम का संघर्ष कभी नहीं बदला। सड़क से लेकर सदन तक उन्होंने हमेशा जनता की आवाज़ बुलंद की,आज ठाकुर राम गुलाम सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के जनसंघर्षों की जीवित मिसाल बन चुके हैं। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि
संघर्ष की राह कठिन जरूर है, लेकिन यही बदलाव की असली ताकत है।



