पेसा कानून और पाँचवीं अनुसूची की अनदेखी क्यों? धरमजयगढ़ केआदिवासियों की जल-जंगल-जमीन पर जबरन कब्जे का मामला विधानसभा में गूंजा

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ग्राम सभा की असहमति के बावजूद जनसुनवाई और जंगल कटाई पर सवाल
धरमजयगढ़ (रायगढ़)।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में धरमजयगढ़ क्षेत्र के आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों का गंभीर मुद्दा उठाया गया। धरमजयगढ़ विधायक श्री लालजीत सिंह राठिया ने विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज के लिए जल, जंगल और जमीन ही जीवन और आजीविका का मुख्य आधार हैं,उन्होंने कहा कि आदिवासी किसान अपनी निजी भूमि पर खेती-बाड़ी कर आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं, लेकिन जब वे अपनी जमीन देना नहीं चाहते, तो पेसा कानून के तहत ग्राम सभा की सहमति के बिना जबरन भूमि अधिग्रहण क्यों किया जा रहा है,विधायक राठिया ने स्पष्ट किया कि संबंधित क्षेत्र पाँचवीं अनुसूची में आता है, जहाँ संविधान के अनुच्छेद 244(1) तथा पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA Act) के तहत ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य है।

इसके बावजूद न तो ग्राम सभा का कोई प्रस्ताव है और न ही उसकी सहमति, फिर भी जबरन जनसुनवाई कर जंगलों की कटाई की जा रही है, जो कानून का खुला उल्लंघन है,उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब ग्रामीण अपनी समस्याएँ और आपत्तियाँ लेकर अधिकारियों के पास जाते हैं, तो न तो उन्हें सुना जाता है और न ही मिलने का अवसर दिया जाता है, जिससे आदिवासियों में रोष और असंतोष बढ़ रहा है,विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि इस गंभीर विषय पर पूरे शासन-प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि आदिवासियों की जमीन सुरक्षित रहे और जो अपनी भूमि नहीं देना चाहते, उनसे जबरन अधिग्रहण न किया जाए।



