छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड से बेघर की मौत — प्रशासन की लापरवाही उजागर? पूरे प्रदेश में तत्काल निर्देश जारी करने की जरूरत

धरमजयगढ़ हेड/अंबिकापुर खबर/ कड़ाके की ठंड ने छत्तीसगढ़ में एक और बेगुनाह की जान ले ली। अंबिकापुर में खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर एक अज्ञात व्यक्ति की ठंड से मौत हो गई। पुराना बस स्टैंड इलाके में मिले शव ने प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार वह भीख मांग कर गुज़ारा करता था और उसके पास गर्म कपड़ों का अभाव था,मंगलवार शाम को राहगीरों ने उसे ठंड से ठिठुरता देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। प्राथमिक जांच में माना जा रहा है कि उसकी मौत ठंड लगने से हुई है,इस बीच अंबिकापुर सहित पूरे सरगुजा संभाग में तापमान खतरनाक स्तर तक गिर गया है। अंबिकापुर का न्यूनतम तापमान 5°C से नीचे, जबकि मैनपाट में पारा 4°C से भी नीचे चला गया है। यहां ओस की बूंदें जमकर बर्फ में बदलने लगी हैं। बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और जगदलपुर सहित 7 बड़े शहरों का तापमान भी 10°C से नीचे पहुंच गया है।मौसम विभाग ने सरगुजा, दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर संभाग के दो से तीन पॉकेट में अगले 48 घंटे तक कोल्ड वेव का अलर्ट जारी किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर ठंड से बचाव के इंतज़ाम नाकाफी नजर आ रहे हैं प्रशासन की सक्रियता पर सवाल बेघरों के लिए शेल्टर होम, अलाव और कम्बलों की व्यवस्था जरूरी,अंबिकापुर में हुई मौत यह संकेत देती है कि ठंड के मौसम में बेघर, मजदूर और वंचित वर्ग के लिए शासन-प्रशासन की ओर से तत्काल और ठोस कदम उठाने की जरूरत है। प्रदेश के कई शहरों में न तो अलाव की सही व्यवस्था है, न ही रैन बसेरों में पर्याप्त इंतज़ाम।मौजूदा हालत को देखते हुए सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि राज्य शासन तुरंत निर्देश जारी करे ताकि—सभी नगर निगम और स्थानीय निकाय रात्री शेल्टर होम चालू करें प्रमुख चौक, बाजार और बस स्टैंड पर अलाव की व्यवस्था हो,बेघरों, मजदूरों और जरूरतमंदों तक गर्म कपड़े और कंबल पहुंचाए जाएं,पुलिस और नगर निगम संयुक्त रूप से रात्रि गश्त कर खुले में सोने वालों को सुरक्षित स्थान पर ले जाए
आगामी दिनों में ठंड और बढ़ने की चेतावनी
मौसम विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में ठंड और तेज होगी। ऐसे में यदि प्रशासन सक्रिय नहीं हुआ तो इस तरह की घटनाएँ और बढ़ सकती हैं।
अंबिकापुर की यह दर्दनाक घटना पूरे छत्तीसगढ़ को चेतावनी देती है कि कड़ाके की ठंड से पहले व्यापक तैयारी और संवेदनशीलता अनिवार्य है।



