आदिवासियों की आवाज़ बने डॉ. ब्रह्मदेव शर्मा— वह आईएएस जिसने सत्ता से लड़कर समाज को जीत लिया,पढ़िए खबर

भारतीय प्रशासनिक सेवा के कर्मठ, ईमानदार और जनप्रिय अधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव शर्मा की पुण्यतिथि पर आज पूरे प्रदेश में उन्हें सादर नमन किया गया। गणित में पीएचडी करने वाले इस विद्वान अधिकारी ने अपना पूरा जीवन भारत के आदिवासी समुदाय के अधिकारों और सम्मान के लिए समर्पित कर दिया,आईएएस होने के बावजूद उनकी पहचान एक ऐसे इंसान की रही, जो सरकारी कुर्सी को लोगों के हितों से ऊपर नहीं रखता था। बस्तर कलेक्टर के रूप में उनकी कार्यशैली आदिवासी समाज के लिए एक सुरक्षा कवच बनकर उभरी। जंगल, जमीन और जल पर आदिवासियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए वे किसी भी स्तर तक गए,1981 में उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में बस्तर कलेक्टर पद से ऐतिहासिक इस्तीफा देकर यह साबित कर दिया कि सत्ता से बड़ा सच और न्याय होता है,मई 2012 में जब सुकमा कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को नक्सलियों ने अगवा कर लिया था, तब डॉ. शर्मा ने शांति दूत की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी मध्यस्थता से ही कलेक्टर की सुरक्षित रिहाई का रास्ता निकला था,डॉ. शर्मा ने न केवल शासन-प्रशासन में संवेदनशीलता की नई मिसाल कायम की, बल्कि सामाजिक आंदोलनों को भी दिशा दी। बरगी बांध विस्थापितों के पुनर्वास कार्य में उन्होंने लोगों को आगे आने के लिए प्रेरित किया। उनकी मानवता, साहस और ईमानदारी आज भी आदिवासी क्षेत्रों के विकास मॉडल के रूप में याद की जाती है,उनकी पूरी जीवन यात्रा एक संदेश देती है—पद से बड़ा व्यक्तित्व होता है, और व्यक्तित्व तब बड़ा होता है जब वह जनता के साथ खड़ा हो,आज उनकी पुण्यतिथि पर समाज, प्रशासन और जन आंदोलनों में सक्रिय लोग उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को न्याय, साहस और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी।



