आदिवासी आंदोलन को मिला जनसमर्थन, जयदेव पटवारी बोले — रायगढ़ के समाजसेवी आगे आएं, जल-जंगल और जंगली जीवों का घर बचाना सबकी जिम्मेदारी है”

धरमजयगढ़ की ठंड में जल-जंगल बचाने निकले ग्रामीणों को मिला सहारा — रायगढ़ के जयदेव पटवारी ने बढ़ाया मदद का हाथ”
धरमजयगढ़।
मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड (अडानी समूह) की प्रस्तावित पुरुंगा भूमिगत कोयला खदान की 11 नवंबर को तय जनसुनवाई को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। प्रभावित ग्राम पंचायत सामरसिंघा, तेंदुमुरी और पुरुंगा के हजारों ग्रामीण—महिला, पुरुष और बच्चे—जनसुनवाई निरस्त करने की मांग को लेकर बीते दिन भर धरमजयगढ़ में डटे रहे।
रात होने पर भी ग्रामीण पीछे नहीं हटे और कड़कती ठंड में खुले आसमान के नीचे रात गुज़ारी। ग्रामीणों में अपने जल, जंगल और जंगली हाथियों के घरों को बचाने की गहरी भावना दिखाई दी।
धरमजयगढ़ के आदिवासी आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए रायगढ़ निवासी समाजसेवी जयदेव पटवारी ने आगे बढ़कर मानवता का परिचय दिया। उन्होंने कहा—भूख में रहकर कुछ नहीं किया जा सकता, इसलिए मैंने ग्रामीणों के लिए फलों की व्यवस्था की है।”
जयदेव पटवारी ने आगे कहा कि,
हम रायगढ़ में रहते हैं और यहां का पर्यावरण पहले ही खतरे में है। धरमजयगढ़ के जंगल और जीव केवल आदिवासियों के नहीं, बल्कि हम सबकी धरोहर हैं। मैं रायगढ़ के सभी समाजसेवियों और पर्यावरण प्रेमियों से अपील करता हूं कि इस आंदोलन को समर्थन दें ताकि जल, जंगल और बेजुबान जंगली जीवों के घरों को बचाया जा सके।”
धरमजयगढ़ का यह संघर्ष अब पर्यावरण और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है, जिसमें स्थानीय लोग अपने अधिकारों और प्रकृति के संरक्षण के लिए डटे हुए हैं।



