धरमजयगढ़ अडानी पुरुंगा कोल खदान की जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों का उग्र विरोध,रातभर कलेक्ट्रेट के सामने डटे रहेंगे ग्रामीण?

धरमजयगढ़।
मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड (अडानी समूह) की प्रस्तावित पुरुंगा भूमिगत कोयला खदान परियोजना (869.025 हेक्टेयर) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रशासन द्वारा 11 नवंबर को ग्राम पुरुंगा में जनसुनवाई आयोजित किए जाने की घोषणा के बाद प्रभावित ग्राम पंचायतों सामरसिंघा, तेंदुमुरी और पुरुंगा के ग्रामीणों ने पेसा कानून छत्तीसगढ़ 2022 का हवाला देते हुए इसका विरोध तेज कर दिया है।ग्रामीणों ने पहले अपने-अपने गांवों में विशेष ग्राम सभा आयोजित कर जनसुनवाई निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद तीनों गांवों के प्रतिनिधि लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय कर पिछले 22 अक्टूबर को जिला कलेक्टर रायगढ़ से मिले और ग्राम सभा के प्रस्ताव की प्रति सौंपते हुए जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की।सूत्रों के अनुसार, अपर कलेक्टर ने 24 घंटे के भीतर ठोस निर्णय का आश्वासन दिया था, लेकिन 14 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर ग्रामीणों ने पुनः आंदोलन का रास्ता अपनाया।

गुरुवार को हजारों की संख्या में ग्रामीण — जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ भी शामिल थीं — जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उनके साथ क्षेत्रीय विधायक लालजीत सिंह राठिया, विधायक उमेश पटेल, सामाजिक कार्यकर्ता जयंत बहिदार, राजेश त्रिपाठी, अनिल अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठक भी मौजूद रहे।प्रशासन ने कलेक्टोरेट परिसर के बाहर बैरिकेटिंग कर ग्रामीणों को रोके रखा, जिसके चलते दोपहर से लेकर देर रात तक विरोध जारी रहा।
रात्रि 9:30 बजे तक ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय परिसर के बाहर डटे रहे और वहीं भोजन बनाकर ठहरने की तैयारी करने लगे।उधर, जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 11 नवंबर की जनसुनवाई निरस्त नहीं की जा सकती।
जबकि ग्रामीण संविधान और पेसा कानून के तहत जनसुनवाई को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।
अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं — कि क्या जनसुनवाई नियत तिथि पर होगी या ग्रामीणों के दबाव में कोई नया निर्णय लिया जाएगा। देर रात तक प्रशासनिक हलचल तेज रही और कुछ घंटों में स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।



