दुर्गापुर SECLऔर कर्नाटक पावर के ओपन कोल ब्लॉक को लेकर सैकड़ों ग्रामीण हुए लामबंद सौंपा ज्ञापन — पेसा कानून उल्लंघन पर प्रशासन को कड़ी चेतावनी

धरमजयगढ़, रायगढ़।
दुर्गापुर कोयला खनन परियोजना व कर्नाटक पावर लिमिटेड के प्रस्तावित खनन क्षेत्र में बिना ग्रामसभा अनुमति किए जा रहे डीजीपीएस सहित हर प्रकार के सर्वे कार्यों के विरोध में आज दुर्गापुर, शाहपुर, धरमजयगढ़, धरमजयगढ़ कॉलोनी, तराईमार, बायसी व बायसी कॉलोनी के सैकड़ों ग्रामीण अचानक SDM कार्यालय धरमजयगढ़ पहुँचे। ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए सहायक भू-अर्जन अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (रा.) को ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों का आरोप है कि—एसईसीएल अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम पंचायतों से अनुमति लिए बिना सर्वे करा रही है, जो पेसा अधिनियम का खुला उल्लंघन है।ग्रामीणों ने बताया कि—पेसा अधिनियम धारा 4(क): भूमि–जल–वन सहित प्राकृतिक संसाधनों पर ग्रामसभा का पूर्ण अधिकार।धारा 4(घ): खनन कार्य की अंतिम स्वीकृति ग्रामसभा देगी।धारा 4(च): उद्योग, खदान, भू-अर्जन व विस्थापन का निर्णय केवल ग्रामसभा कर सकती है।प्रभावित पंचायतों की किसी भी ग्रामसभा ने खनन को मंजूरी नहीं दी है, बल्कि सर्वसम्मति से विरोध के प्रस्ताव पारित किए गए हैं। इसके बावजूद कंपनियों द्वारा हो रहा सर्वे ग्रामीणों के अनुसार अवैध और असंवैधानिक है।ग्रामीणों ने बताया कि—6 नवंबर 2025 को भी सर्वे रोकने के लिए आवेदन दिया गया था, पर प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि—यदि सर्वे तुरंत नहीं रोका गया, तो किसान उग्र आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
कर्नाटक पावर के प्रस्तावित 1610 हेक्टेयर क्षेत्र में पहले से ही जबरदस्त विरोध
कर्नाटक पावर का कुल प्रस्तावित क्षेत्र 1610 हेक्टेयर का है, जिसे पहले डीबी पावर और बाल्को (भारत एल्यूमिनियम कंपनी) को आबंटित किया गया था।इन कंपनियों की जनसुनवाई के दौरान भी किसानों का भारी विरोध दर्ज हुआ था।
किसानों ने—एनजीटी भोपाल और दिल्ली तथा हाईकोर्ट में भी याचिकाएँ दायर की थीं।ग्रामीणों ने तब भी जमीन देने से साफ इनकार किया था।
इसके बाद 24 दिसंबर 2014 को कोल स्कैम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों कंपनियों का आबंटन रद्द कर दिया था।नीलामी के बाद अब यह क्षेत्र कर्नाटक पावर लिमिटेड को मिला है।लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि—जहाँ पहले ही जनता विरोध कर चुकी है, वहाँ कर्नाटक पावर के लिए कोयला निकालना किसी भी हाल में आसान नहीं होगा।प्रभावित किसानों ने फिर से विरोध का बिगुल फूँक दिया है।ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कीमत पर अपनी जमीन और क्षेत्र को बर्बाद नहीं होने देंगे।



