आदिवासी अधिकारों की गूंज बायसी ग्रामसभा ने कर्नाटक पॉवर के कोल ब्लॉक को पूरी तरह ठुकराया

बायसी (धरमजयगढ़)
ग्राम पंचायत बायसी की ग्रामसभा ने पाँचवीं अनुसूची (1996) और छत्तीसगढ़ पेसा अधिनियम 2022 में प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए कर्नाटक पॉवर लिमिटेड के प्रस्तावित 1610 हेक्टेयर ओपन कोल ब्लॉक को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया। 1 दिसंबर 2025 को आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में ग्रामसभा ने साफ कहा कि 1070 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र में खनन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।ग्रामसभा ने अपने प्रस्ताव में स्पष्ट किया कि भूमि, जल, वन, प्राकृतिक संसाधनों पर समुदाय का संवैधानिक अधिकार सर्वोपरि है। पेसा अधिनियम की धारा 4 (क), 4 (घ), 4 (च) और 4 (ज) के आधार पर ग्रामसभा को खनिज कार्यों की स्वीकृति/अस्वीकृति का अंतिम अधिकार प्राप्त है—और इस अधिकार का प्रयोग करते हुए ग्रामसभा ने कोल ब्लॉक को पूर्णतः अस्वीकार किया।

1070 हेक्टेयर क्षेत्र पूर्ण रूप से प्रभावित – वन भूमि और हाथियों का संकट भी बड़ा कारण
कर्नाटक पॉवर लिमिटेड का कुल 1610 हेक्टेयर प्रस्तावित क्षेत्र में 1070 हेक्टेयर भूमि सीधे बायसी एवं आसपास के गांवों को प्रभावित कर रही है। इनमें 365.056 हेक्टेयर वनभूमि शामिल है, जहाँ लगातार जंगली हाथियों का विचरण होता है।
वन विभाग के अनुसार 2001 से अब तक क्षेत्र में हाथियों के हमले से 59 ग्रामीणों की मौत हुई है, वहीं 23 हाथियों की भी विभिन्न कारणों से मृत्यु दर्ज है। ग्रामसभा ने कहा कि जंगल की कटाई से मानव–वन्यजीव संघर्ष और बढ़ेगा, इसलिए इस क्षेत्र को संरक्षित रखना आवश्यक है।
आदिवासी देवस्थानों व सांस्कृतिक विरासत पर भी खतरा
ग्रामसभा ने बताया कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र में आदिवासियों के पुरखा देव, बूढ़ी माता, ठाकुर देव, दुल्हा देव, खूंट गौरैया, पीठा पाठ समेत कई पारंपरिक देवस्थानों का अस्तित्व मिट जाएगा। ग्रामीणों ने इसे अपनी सांस्कृतिक अस्मिता पर सीधा हमला बताया।
कृषि, आय और जलस्त्रोतों पर बड़ा खतरा
क्षेत्र के हजारों किसान धान, मक्का, तरबूज उत्पादन से प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख रुपये तक की आय प्राप्त करते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि खनन से भूमि बंजर होगी, जल स्रोत दूषित होंगे और कृषि लगभग समाप्त हो जाएगी।भू-अर्जन चिह्नांकन हटाने का निर्देश भी प्रस्ताव में शामिल ग्रामसभा ने बताया कि किसानों की जमीन पर पटवारी द्वारा भू-अर्जन क्षेत्र अंकित कर दिया गया है। प्रस्ताव में अनुविभागीय अधिकारी धरमजयगढ़ को इसे तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया है ताकि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में बाधा न हो।ग्रामसभा का अंतिम निर्णय—खनन पूर्णत: अवैध घोषितग्रामसभा ने सर्वसम्मति से घोषणा की कि स्पष्ट असहमति के बाद इस क्षेत्र में—किसी भी प्रकार का खनन, सर्वे, सार्वजनिक सुनवाई, भूमि अधिग्रहण—पूरी तरह अवैध और असंवैधानिक माना जाएगा।ग्राम पंचायत बायसी का यह ऐतिहासिक फैसला क्षेत्र में जंगल-जल-जमीन और आदिवासी परंपराओं की रक्षा की एक सशक्त मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।



