जल जंगल जमीन की रक्षा का संकल्प धरमजयगढ़ में आदिवासी समाज का ऐतिहासिक की भागीदारी,देखे वीडियो

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के तत्वावधान में बुधवार को धर्मजयगढ़ के दशहरा मैदान में धर्ती आबा बिरसा मुंडा जयंती एवं संविधान दिवस का संयुक्त भव्य समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र की सैकड़ों की संख्या में आदिवासी महिलाएँ, पुरुष, युवा और बच्चे शामिल हुए। मंच पर क्षेत्रीय विधायक लालजीत सिंह राठिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि समाज के वरिष्ठजन, ग्राम प्रमुख, जनप्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
एकता, अधिकार और संघर्ष का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन कर आदिवासी समाज ने अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और संरक्षण का संकल्प दोहराया। मंच से वक्ताओं ने कहा कि धर्ती आबा बिरसा मुंडा के संघर्षों ने आदिवासियों को जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ने का साहस दिया। आज भी वही प्रेरणा समाज को एकजुट रखती है।
ज्वलंत मुद्दों पर गहन चर्चा
कार्यक्रम में आज़ादी, पहचान, संस्कृति और भूमि-अधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि विकास की दौड़ में आदिवासी समाज की परंपराओं, अस्तित्व और अधिकारों को लगातार चुनौती मिल रही है। कई गांवों में आज भी भूमि अधिग्रहण, खनन, वन अधिकार मान्यता और विस्थापन जैसी समस्याएँ सामने हैं, जिन पर गंभीरता से कार्रवाई की आवश्यकता है।
सच्ची घटना का उल्लेख—बिरसा की प्रेरणा आज भी जीवित
कार्यक्रम में स्थानीय बुजुर्गों ने वह सच्ची घटना भी साझा की, जब कुछ वर्ष पहले क्षेत्र के एक गांव के आदिवासी परिवारों ने बिना किसी भय के अपनी पारंपरिक जमीन को बचाने के लिए सरपंच और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने खड़े होकर कहा— यह जमीन हमारे पुरखों की है, इसे न हम बेचेंगे और न किसी कीमत पर छोड़ेंगे।
इस घटना को बताकर समारोह में वक्ताओं ने जोर दिया कि बिरसा मुंडा ने भी इसी साहस और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए आंदोलन किया था, और आज भी आदिवासी समाज उसी मूल भावना के साथ अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है।
मांगपत्र सौंपा, रैली भी निकाली
कार्यक्रम के अंत में सर्व आदिवासी समाज ने क्षेत्र में बढ़ते खनन, वनाधिकार दावों के लंबित प्रकरण, पारंपरिक संस्कृति संरक्षण, युवाओं के लिए शिक्षा–रोजगार जैसी समस्याओं को सूचीबद्ध करते हुए एक मांगपत्र महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम सौंपा।इसके पश्चात् रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी आदिवासी महिलाओं और युवाओं ने रैली निकालकर बिरसा मुंडा के आदर्शों और संविधान की रक्षा का संदेश दिया। रैली के दौरान “जल-जंगल-जमीन हमारा है आदिवासी एकता ज़िंदाबाद जैसे नारे गूंजते रहे।



