कलेक्टोरेट के सामने माँ ने दुधमुंहे बच्चे संग काट रही रात ?— अडानी की जनसुनवाई के विरोध में आदिवासी महिलाओं का साहस झकझोर देने वाला मंजर

धरमजयगढ़ // रायगढ़//सबसे तेज//
अडानी समूह की प्रस्तावित मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड पुरुंगा भूमिगत कोल खदान परियोजना (869.025 हेक्टेयर) को लेकर जनसुनवाई की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे विरोध का ताप और बढ़ता जा रहा है।ग्राम पंचायत सामरसिंघा, तेंदुमुरी और पुरुंगा के हजारों प्रभावित ग्रामीणों ने 11 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर दिया। प्रशासन ने कलेक्टोरेट को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया और बैरिकेडिंग कर ग्रामीणों को अंदर जाने से रोक दिया।
भीड़ में वह दृश्य सबको झकझोर गया — जब एक आदिवासी महिला अपने दुधमुंहे बच्चे को गोद में लिए ठंड में कलेक्टोरेट परिसर में बैठी रही। उसके चेहरे पर थकान थी, पर हिम्मत अटूट। अपने अधिकार की लड़ाई में वह मां पीछे नहीं हटी।रात गहराती गई, ठंड बढ़ती गई, लेकिन ग्रामीण खुले आसमान के नीचे डटे रहे। महिलाएँ अपने बच्चों को कंबल में लपेटे बैठी रहीं। किसी ने रोटियां सेंकीं, किसी ने आग जलाकर बच्चों को गर्म रखा।
ग्रामीणों का कहना है कि “हमने ग्राम सभा में जनसुनवाई निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया है, अब प्रशासन को हमारा निर्णय मानना होगा।”वहीं, जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने स्पष्ट कहा कि 11 नवंबर की जनसुनवाई निरस्त नहीं की जाएगी, जिससे आक्रोश और बढ़ गया।
कलेक्टोरेट के बाहर रातभर जागते ग्रामीणों का यह मंजर सवाल खड़ा करता है —
क्या विकास की कीमत इन माताओं की गोद में सोते बच्चों से वसूली जाएगी?क्या प्रशासन की संवेदना अब भी ठंडी है, जब धरती की बेटियाँ खुले आसमान के नीचे अपने अधिकार की रक्षा में डटी हैं?



